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Tuesday, April 16, 2019

जानें शरीर में कितना होना चाहिए हीमोग्लोबिन का लेवल

जानें शरीर में कितना होना चाहिए हीमोग्लोबिन का लेवल

संतुलित मात्रा में होना चाहिए आयरन
शरीर में आयरन की कमी होना सेहत के लिए हानिकारक होता है, लेकिन आयरन की अधिकता भी उतनी ही नुकसानदेह होती है। यानि आयरन शरीर के लिए आवश्यक तो है, लेकिन संतुलित मात्रा में। एक स्वस्थ शरीर में आयरन की मात्रा 20 ग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए, इससे अधिक होने पर शरीर में हीमोक्रोमेटिक रोग के लक्षण पनपने लगते हैं। आयरन का मुख्य कार्य खून के प्रमुख घटक, लाल रक्त कणों का निर्माण करना करना है। इतना ही नहीं, हीमोग्लोबिन के निर्माण का कार्य भी आयरन करता है, जो शरीर के अंगों को सुडौल बनाकर, शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
क्या है हीमोग्लोबिन 
हड्डियों के अंदरूनी भाग में पाया जाने वाला गूदा या अस्थिमज्जा, रक्त कणों की जननी है। यानी अस्थिमज्जा में ही हर तरह के रक्त कण बनते हैं, जिनमें लाल रक्त कणों की भरमार होती है। एक क्यूबिक मिलीलीटर रक्त में लगभग 50 लाख लाल रक्त कण होते हैं। एक बूंद खून को सूक्ष्मदर्शी से देखने पर रक्त के लाल कण गोल-गोल तश्तरियों की तरह नजर आते हैं, जो किनारे पर मोटे और बीच में पतले दिखते हैं। इन लाल रक्त कणों के अंदर हीमोग्लोबिन भरा होता है। लाल रक्त कणों के अंदर 30-35 प्रतिशत भाग हीमोग्लोबिन का होता है। अस्थिमज्जा में ही विटामिन बी-6 यानी पाइरिडॉक्सिन की उपस्थिति में लोहा, ग्लाइलिन नामक एमिनो एसिड से संयोग कर 'हीम' नामक यौगिक बनाता है, जो ग्लोबिन नामक प्रोटीन से मिलकर हीमोग्लोबिन बनता है। इससे स्पष्ट है कि हीमोग्लोबिन, रक्त का मुख्य प्रोटीन तत्व है।
शरीर में रक्त का स्तर बताता है
हीमोग्लोबिन शरीर में खून का स्तर बताता है। खून की कमी का पता ब्लड टेस्ट से चलता है। हीमोग्लोबिन हीमो (आयरन) ग्लोबिन (प्रोटीन) से मिलकर बना है। यदि लेवल कम है तो बच्चे को डॉक्टरी सलाह से आयरन व प्रोटीन बढ़ाने वाली दवाएं और डाइट देनी चाहिए। प्राकृतिक रूप से पालक, सेब, अनार में आयरन होता है। दूध, पनीर और दाल में प्रोटीन होता है। उम्रवार हीमोग्लोबिन लेवल यह होना चाहिए: 
5 वर्ष तक- 10.9-15.0 एचजी 
5-11 वर्ष- 11.9-15.0 एचजी
11-18 वर्ष - 11.9-15.0 एचजी

Saturday, February 23, 2019

गलत खानपान कहीं आपकी नींद न उड़ा दे


गलत खानपान कहीं आपकी नींद न उड़ा दे

हम भोजन में कुछ ऐसी चीजों को शामिल कर देते हैं जिन्हें खाने से पहले समय को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ चीजों के बारे में :-
चाय या कॉफी:
सोने से पहले पीने से इनमें मौजूद कैफीन दिमाग को सक्रिय कर नींद लाने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है।
चॉकलेट:
इसमें फैट व कैफीन अधिक मात्रा में होते हैं जो अनिद्रा की समस्या के साथ दांतों पर भी बुरा असर डालते हैं।
आइसक्रीम:
इसमें मौजूद चीनी की अधिक मात्रा शुगर का स्तर बढ़ा देती है जिससे नींद के लिए जरूरी आलस का भाव गायब हो जाता है।
ये भी रखें ध्यान
शराब : यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न के अनुसार लोग सोचते हैं कि इसे पीने से अच्छी नींद आती है लेकिन असल में यह सुकून भरी नींद में खलल डालने का काम करती है।
मसालेदार भोजन : इससे पेट में एसिड बनता है जो सोते समय गले तक आकर जलन व बेचैनी का कारण बनता है और व्यक्ति की नींद खुल जाती है। इसलिए रात के समय दलिया, खिचड़ी व इडली जैसा हल्का आहार लें।

Monday, January 21, 2019

जानिए सर्दियों के मौसम में शकरकंदी खाने के फायदे


जानिए सर्दियों के मौसम में शकरकंदी खाने के फायदे



सर्दियों के मौसम में शकरकंदी न केवल फिट और तंदुरुस्त बनाती है, बल्कि मोटापे में भी कमी लाती है। शकरकंदी में आलू के मुकाबले 300 कैलोरी कम होती है। फाइबर से हमारा पेट लंबे समय तक भरा भी रहता है। शकरकंदी खाने से जल्दी भूख नहीं लगती और आप ओवरइटिंग से बच जाते हैं।
शकरकंदी में आयरन, कॉपर, मैगनीशियम व विटामिन होता है जो हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। इसे खाने से त्वचा में चमक आती है और चेहरे पर जल्दी झुर्रियां नहीं पड़तीं।
इसमें विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, आयरन, फॉस्फोरस, विटामिन सी के अलावा बीटा कैरोटीन प्रचुर मात्रा में होता है। इसलिए यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने का काम करता है।
शकरकंदी शरीर को गर्म भी रखती है और इसमें मौजूद विटामिन सी से ब्रोंकाइटिस व फेफड़ों की परेशानी में आराम मिलता है।
यह मैगनीशियम, जिंक, व बीटा कैरोटीन होते हैं इसलिए यह गठिया या आर्थराइटिस के मरीजों के लिए भी फायदेमंद होती है।
शकरकंदी को एंटी कार्सिनोजन (कैंसर से राहत दिलाने वाला) माना जाता है। यह आंतों के कैंसर से भी बचाती है।
डायबिटिक भी इसे खा सकते हैं। इससे रक्त में शर्करा का स्तर ठीक रहता है और इंसुलिन की मात्रा भी नियंत्रित रहती है। आप इसे भूनकर या उबालकर खा सकते हैं।

Sunday, January 13, 2019

किडनी को इन तरीकों से रख सकते हैं दुरुस्त


किडनी को इन तरीकों से रख सकते हैं दुरुस्त



हमारे शरीर के खास अंगों में एक है किडनी। कैंसर और दिल की बीमारी के बाद किडनी में खराबी तीसरी बड़ी जानलेवा बीमारी बनती जा रही है। एनजीओ 'द नेशनल किडनी फाउण्डेशन ऑफ इण्डिया के अध्ययन में खुलासा हुआ है कि भारत में किडनी से संबंधी बीमारियों के मरीज काफी तादाद में बढ़ रहे हैं। भारत में सालाना करीब 90 हजार किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। ऐसे में शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त रखने के लिए किडनी को फिट रहना बेहद जरूरी है। आइये जानते हैं कि हम अपनी किडनी को कैसे दुरुस्त रख सकते हैं।
ये करें -
हमेशा ताजे फल और सब्जियां खाएं और खूब पानी पीएं।
कम वसा (फैट) वाले पदार्थ खाएं। ज्यदा तेल चिकनाई वाली चीजें न खाएं । 
व्यायाम करने को अपनी आदत में शामिल करें।
इनसे रहें दूर -
किडनी को स्वस्थ रखने के लिए धूम्रपान और शराब के सेवन से दूर रहें, किडनी को फिट रखने की यह सबसे बड़ी सीख है।
खाने में नमक की मात्रा घटाएं।
दर्द निवारक दवाओं का इस्तेमाल कम करें।
मोटापा व वजन न बढ़ने दें।