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Sunday, December 30, 2018

एेसे करें कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल


एेसे करें कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल



शरीर में कोशिकाओं के कार्यकलाप और उनकी मरम्मत, एस्ट्रोजन व टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के निर्माण के लिए कोलेस्ट्रॉल काफी जरूरी होता है। इसकी अधिकता से हृदय संबंधी रोगों का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन खानपान के तौर तरीकों में बदलाव और नियमित व्यायाम से इसे नियंत्रण में रखा जा सकता है।
यह है कोलेस्ट्रॉल -
फिजिशियन अनुसार कोलेस्ट्रॉल शरीर में मौजूद एक पदार्थ है जो हमारे रक्त और कोशिकाओं में मौजूद होता है। यह शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक होता है लेकिन इसकी अधिकता खतनाक हो सकती हैै। कोलेस्ट्रॉल का पता लगाने के लिए लिपिड प्रोफाइल टेस्ट सुबह के समय खाली पेट किया जाता है। तली-भुनी चीजें व जंकफूड ज्यादा खाने, व्यायाम ना करने और अनुवांशिकीय कारणों की वजह से कोलेस्ट्रॉल की समस्या होती है।
कोलेस्ट्रॉल लेवल (मिलिग्राम पर्सेंट)
सामान्य : 130-250
आदर्श : 200 से कम
एचडीएल : 45 से ज्यादा
एलडीएल : 130 से कम
तीन प्रकार का होता है
यह तीन प्रकार का होता है। एचडीएल, एलडीएल और वीएलडीएल।
एचडीएल : यह बढ़िया कोलेेस्ट्रॉल होता है जो दिल की धमनियों में वसा को जमने नहीं देता।
एलडीएल व वीएलडीएल दोनों हृदय के लिए खराब होते हैं। इनमें एलडीएल दिल को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।
व्यायाम से बनें फिट
चलते रहें : जितना पैदल चलेंगे, उतने ही फिट रहेंगे और इससे कोलेस्ट्रॉल भी कंट्रोल में रहेगा। रोजाना कम से कम 45 मिनट की वॉक जरूर करें।
कसरत से हो दिन की शुरुआत : अपनी लाइफ में रोजाना आधे घंटे की एक्सरसाइज को जरूर शामिल करें। इससे न सिर्फ वजन कंट्रोल में रहेगा बल्कि कोलेस्ट्रॉल लेवल भी खतरे के निशान तक नहीं पहुंचेगा। इसके लिए आप साइकिल चलाएं, स्वीमिंग करें या योग का सहारा भी ले सकते हैं।
खानपान : अपनी डाइट में हरी सब्जियां जैसे पालक, मटर, हरा प्याज आदि शामिल करें। फाइबर फूड जैसे पत्तागोभी, मशरूम और सूखे मेवे अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ाते हैं। मौसमी फल जरूर खाएं। सलाद को भी आहार का हिस्सा जरूर बनाएं।
ध्यान रहे : दिल की सेहत के लिए महीनों, सालों तक सिर्फ एक ही प्रकार के कुकिंग ऑयल में खाना बनाने की बजाय अलग-अलग तेल का प्रयोग करें। इसके लिए सरसों या अलसी का तेल और गाय के घी का प्रयोग किया जा सकता है।

Wednesday, December 26, 2018

खड़े होकर ना खाएं खाना, ना पिए पानी, हाेता है ये नुकसान

खड़े होकर ना खाएं खाना, ना पिए पानी, हाेता है ये नुकसान


शादी, पार्टी या किसी समारोह में लोग अक्सर खड़े होकर खाना पसंद करते हैं लेकिन ऐसा करना आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे अपच, मोटापा, कब्ज, गैस, घुटनों का दर्द, कमरदर्द की समस्या भी हो सकती है।
जमीन पर खाने के फायदेजब हम जमीन पर बैठकर खाना खाते हैं तो खाने की बाइट(कौर) तोड़ने के लिए आगे की ओर झुकते हैं जिससे पेट पर दबाव पड़ता है और फिर खाना मुंह में डालने के लिए पीछे की ओर आते हैं, जिससे पेट को आराम मिलता है। इस तरह खाना अच्छी तरह से पचता है और हमें अंदाजा होता रहता है कि पेट भरा या नहीं।
इस तरह पानी ना पीएं
जब हम खड़े होते हैं तो पाचन प्रणाली खिंची हुई रहती है, ऐसे में जब हम पानी पीते हैं तो पानी सीधा आंतों में आने लगता है और ब्लड में एब्जोर्ब होकर जल्दी ही शरीर से बाहर निकल जाता है। इससे अपच होती है और मोटापा बढऩे लगता है। यही बढ़ता हुआ वजन आगे चलकर घुटनों के दर्द की 
वजह बनता है।

Thursday, December 13, 2018

How fever is beneficial?

How fever is beneficial?

1. Leukocytes show maximum phagocytic activity between
38-40°C
2. During fever the circulating iron level goes down. Iron is
helpful for the growth and reproduction of bacteria. So,
when circulating iron level goes down, bacterial growth is
prevented
3. Fever produces direct inhibiting effect on certain viruses
like polio and coxsackie viruses.

होम्योपैथ दवाओं के ज्यादा असर के लिए जानें ये खास बातें


होम्योपैथ दवाओं के ज्यादा असर के लिए जानें ये खास बातें


एलोपैथी में जिस तरह 400 से 500 एमजी की गोली होती है, उसी तरह होम्योपैथी में तीन से लेकर एक लाख की पोटेंसी (पावर) होती है। जिन्हें तीन स्केल डेसिमल, सेंटीसिमल और 50 मिलिसिमल में मापा जाता है। किसी भी दवा की पोटेंसी जितनी ज्यादा होगी उसका प्रभाव उतना ही अधिक होता है। जब दो दवाइयां लेनी होती हैं तो डॉक्टर रोगी को कुछ दिनों के गेप में दवा लेने के लिए कहते हैं क्योंकि दवा की मात्रा बढ़ाकर देने से उसका असर कई दिनों या हफ्तों तक रहता है। असर खत्म होने पर ही दूसरी दवा काम कर पाती है। दवा को सुबह या शाम में लेने के लिए कोई सख्त नियम नहीं होता, लेकिन विशेष समय में इसका असर ज्यादा होता है।
दवा के असर के लिए ये बातें याद रखें -
होम्योपैथी दवा की शीशी कभी खुली जगह पर न रखें और शीशी के ढक्कन को कभी भी खुला न छोड़ें। दवा चाहे लिक्विड हो या गोलियां हों दवा को खुले में रखने से ये बेअसर हो जाती है। दवा को हाथ में लेकर न खाएं इसे सीधे ढक्कन नें लेकर मुंह में डाल लें।
होम्योपैथी दवा खाने से आधे घंटे पहले और आधे घंटे बाद तक कोई चीज न खाएं। इससे दवा जल्दी और प्रभावी तरीके से असर करती है।
होम्योपैथी इलाज के दौरान तंबाकू, शराब, सिगरेट या किसी अन्य नशीली चीज का सेवन न करें।

Wednesday, December 5, 2018

तन अाैर मन दाेनाें काे सेहतमंद रखता है ध्यान


तन अाैर मन दाेनाें काे सेहतमंद रखता है ध्यान



आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मन का सुकून न जाने कहां खाे गया है। हर काेर्इ कुछ हासिल करने की चाह में भागा जा रहा है। इस भागमभाग से लाेग जीवन की इन उपब्धियां ताे हासिल कर रहे हैं लेकिन मन में शांति नहीं है। तनाव ने उन्हें घेर रखा है। हाल के कुछ अध्ययनों से पता चला है कि लोगों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समय से पहले ही खराब हो रहा है।ये बात सच है की हम अपनी उपब्धियाें का जश्न तभी अच्छे से मना सकते हैं जब हम मन आैर तन दाेनाें से सुखी हाें।इसलिए हमें अपने जीवन में उस एक्टिविटी काे भी शामिल करना चाहिए जाे हमारे तनाव काे दूर कर सके। एेसी एक एक्टिविटी है ध्यान, पुराने समय से तन आैर मन काे सेहतमंद रखने के लिए ध्यान का प्रयाेग किया जाता है। ताे भी थाेडा समय निकाल कर ध्यान करें। इससे आपकाे बहुत फायदा हाेगा। आइए जानते हैं ध्यान के फायदे :-
दिमाग और शरीर के लिए ध्यान
ज्यादातर लोगों को नहीं पता होता है कि उन्हें कैसे अपने संतुलन को खोए बिना जीवन की विपरीत परिस्थितियों में दबाव को संभालते हुए खुश और शांत रहना है। मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने और भावनाओं को काबू में रखने के लिए ध्यान सबसे अच्छा और सहज विकल्प है। ध्यान की तकनीक को सीखना और इसका अभ्यास करना आसान है। इसमें हमारे जीवन के सभी क्षेत्रों को प्रभावित करने वाले कई फायदे हैं।
दिमागी क्षमता बढ़ाता है
ध्यान हमें अपने मस्तिष्क के उन क्षेत्रों तक पहुंचने की इजाजत देता है जो गहन विचार और संज्ञान के लिए जिम्मेदार हैं, जिससे हमें रचनात्मक बनने में और निर्णय लेने में मदद मिलती है। ध्यान हमें सतर्क और तेज बनाता है साथ ही इससे याददाश्त भी अच्छी होती है। यहां तक कि शोधकर्ता अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी गंभीर दिमागी बीमारियों के इलाज के रूप में ध्यान को कारगर पा रहे हैं।
सुकून भरी नींद 
हमारी वर्तमान जीवनशैली में हम में से अधिकांश शांत और गहरी नींद से वंचित हैं, जिससे हमारे मस्तिष्क पर भोझ पड़ता है। इससे मनोदशा विकार, कमजोर प्रतिरक्षा, वजन बढ़ना, ह्रदय रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। शोध में पाया गया है कि रात में 6 से 8 घंटे से कम समय तक सोने से मौत का जोखिम 12 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। ध्यान, नींद की बेहतर गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है। कई अध्ययनों से पता चलता है कि सामान्य लोगों की तुलना में ध्यान करने वाले लोग बेहतर और गहरी नींद लेते हैं।
उम्र का प्रभाव कम
ध्यान का प्रभाव हमारे विचार से गहरा बनता है। यह न केवल हमारे मस्तिष्क और व्यवहार को प्रभावित करता है, बल्कि इससे हम खुश, केंद्रित और जागरूक बनते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग ध्यान करते हैं उनकी उम्र के विकास में स्थिरता आती है। इसके अलावा ध्यान से टेलोमेयर ग्रंथि की रक्षा होती है। जैसे-जैसे टेलोमेयर पुरानी होती जाती है , वैसे ही हमारे शरीर और दिमाग भी वृद्ध होता जाता है।