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Sunday, November 25, 2018

कहीं आपकी सेहत न खराब कर दे मीठे का शाैक !


कहीं आपकी सेहत न खराब कर दे मीठे का शाैक !


आप अगर मीठे के शाैकिन है तो सावधान हो जाइए, क्याेंकि यह शाैक आपकी सेहत के लिए हानिकारक हाे सकता है। आमतौर पर कुछ दिनाें के अंतराल पर मिठार्इ खा सकते हैं लेकिन राेज अाैर दिन में कर्इ बार मिठार्इयाें का सेवन आपके लिए हानिकारक हो सकता है। खासकर की बाजार की मिठार्इयां, इनसे आपका वजन बढ़ने खतरा ज्यादा रहता है। आइए जानते काैन सा मीठा आपके लिए नुकसान दे है :-
मिठाई
मिठाई के बिना कोई त्यौहार अपूर्ण है। बाजार विभिन्न स्वाद के साथ ही मिठाई और रंग प्रदान करता है। त्योहारों के अवसर पर मिठाई भी खाई जाती है। लेकिन मिठाई हमेशा मात्रा में बहुत खाते हैं क्योंकि यह वजन बढ़ा सकता है। यदि आप वजन कम कर रहे हैं, तो मिठाई से बचने के लिए सबसे अच्छा है। मिठाई में घी का उपयोग किया जाता है। बहुत सारी चीनी का इस्तेमाल मिठाई में किया जाता है। ये सब चीजे वजन बढ़ने के कारण हैं।
केक
जब केक का नाम आता है, तो मुंह में पानी भर जाता है। हर कोई छोटे से बड़े तक, केक खाना पसंद करता है। लेकिन केक और पेस्ट्री पर आइसिंग लगी होती है। इससे खाने से शरीर में शुगर लेवल बढ़ जाता है जिससे खाने से सेहत को नुकसान होता है।
आईसक्रीम
आईसक्रीम एक ऐसी चीज है जो हर मौसम में पसंद से खाई जाती है। लेकिन इसमें उच्च मात्रा में वसा और कैलरी पाई जाती है। यह हृदयरोग का कारण बन सकती है। आइसक्रीम में सैचुरेटेड फैट होता है। सैचुरेटेड फैट की अतिरिक्त खपत से रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा सकती है। इसके अलावा दिल के दौरे और स्ट्रोक का भी खतरा हो सकता है। इसमें शुगर की मात्रा भी अधिक होती है। इससे वजन बढ़ता है।
कोल्ड ड्रिंक
कई लोगों को नियमित कोल्ड ड्रिंक पीने की आदत होती है। पर ये आदत आपके हेल्थ पर गलत प्रभाव डाल सकती है। इसके सेवन से डायबिटीज, मोटापा जैसी बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा कोल्ड ड्रिंक किडनी को भी बहुत नुकसान पहुंचाती हैं। अधिक मात्रा में कोल्ड ड्रिंक का सेवन करने से आपको पथरी और किडनी फेल होने के चांसेस बढ़ जाते हैं। कोल्ड ड्रिंक में भरपूर मात्रा में एसिडिटीक लिक्विड और फास्फोरस जैसे तत्व मौजूद होते हैं।

Tuesday, November 20, 2018

अपने लिए निकालें आधे घंटे का समय, तनाव रहेगा कोसों दूर


अपने लिए निकालें आधे घंटे का समय, तनाव रहेगा कोसों दूर



बदलती लाइफस्टाइल की वजह से आजकल हर कोई तनाव में रहता है लेकिन छोटी-छोटी बातों का ख्याल रख तनाव को मैनेज किया जा सकता है।
समय निकालें:अपने लिए आधे घंटे का समय निकालें। इस दौरान अपनी कार्यक्षमता का आंकलन करें। लक्ष्यों को तय करें और इनके प्रति सकारात्मक सोच अपनाएं।
बढ़िया खाएं:ताजे फल-सब्जियां खाएं व पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं।
व्यायाम करें:
व्यायाम करें, फिल्में देखें व खुद को ट्रीट दें, इससे स्ट्रेस कैमिकल नष्ट होते हैं।
ऐसा न करें:
नशीले पदार्थों के सेवन और धू्रमपान से दूर रहें।
सेविंग:पैसों की कमी से तनाव होता है, इसलिए सेविंग करें।
संगीत:टीवी सीरियल देखने की बजाय म्यूजिक सुनें क्योंकि संगीत सुकून देता है।
शेयरिंग:अपनी भावनाएं दूसरों के साथ शेयर करें।
रिलेशन:किसी को भी दोषी ठहराने से पहले खुद को उसकी जगह रखकर सोचें।
मसाज:हफ्ते में एक बार मसाज करें। रक्त का प्रवाह सही रहेगा और मूड भी अच्छा रहेगा।

Sunday, November 18, 2018

गौर करें कि आपके बच्चे को सुनाई दे रहा है या नहीं


गौर करें कि आपके बच्चे को सुनाई दे रहा है या नहीं


बच्चा जिस परिवेश में भाषा सुनता है, अपने आप उसी तरह बोलने लगता है। लेकिन यदि उसे सुनाई ही न दे तो स्वरयंत्र दुरुस्त होते हुए भी वह मूक रह जाता है। इन बच्चों को समय रहते सुनाई देने लगे तो वे बोलने लगते हैं। इसके लिए गौर करें कि आपके बच्चे को सुनाई दे रहा है या नहीं।
इलाज : कान की कुछ जांचाें के बाद हिअरिंग एड लगाकर बच्चे को समझने व बोलने का अभ्यास कराया जाता है। यह तरीका कारगर न होने पर कॉक्लीयर इम्प्लांट सर्जरी की जाती है। इसमें कृत्रिम रूप से प्रत्यारोपित उपकरण कान के अंदरुनी भाग कॉक्लीया का काम करता है।
इन बातों पर ध्यान दें
- शुरुआती छह माह में बच्चा तेज शोर की ओर ध्यान न दे।
- आवाज करने वाले खिलौनों में दिलचस्पी न ले।
- 6 माह से 15 माह तक माता-पिता की आवाज पर खुश न हो और न ही कोई प्रतिक्रिया देता हो।
- सामान्य शब्दों को भी न समझ सके और 1 से 3 साल तक सरल शब्द जैसे मामा, दादा और पापा भी न बोल पाता हो।

Tuesday, November 13, 2018

डायबिटीज से इन पांच अंगों पर पड़ता बुरा असर


डायबिटीज से इन पांच अंगों पर पड़ता बुरा असर


सभी अंगों पर असर होता है लेकिन पांच अंग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। डायबिटिक फुट भी एक गंभीर समस्या है जिसके कुछ मामलों में पैर काटने तक की नौबत आ जाती है।
डायबिटिक न्यूरोपैथी
मरीज के हाथों-पैरों में सुन्नपन, जलन, दर्द और झुनझुनी होती है, दर्द नहीं होता है। चोट लगने पर पता नहीं चलता है। ब्लड में ग्लूकोज अधिक होने पर सेल्स खराब होते हैं जिससे कुछ अहसास नहीं हो पाता है।
पैरालिसिस अटैक
ब्लड में शुगर की मात्रा बढऩे से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। दिमाग की नसों में थक्का जमने से हाथों व पैरों के काम करने की क्षमता खत्म होती है। पैरालिसिस अटैक से बचने के लिए ब्लड शुगर को नियंत्रित करें।
डायबिटिक नेफ्रोपैथी
अनियंत्रित ब्लड ग्लूकोज से गुर्दों पर बुरा असर पड़ता है। किडनी इंफेक्शन के बाद क्रॉनिक किडनी डिजिज होती है। रोगी का ब्लड प्रेशर भी असंतुलित रहता है। किडनी के मरीजों का डायलिसिस होता है।
हार्ट प्राब्लम
हार्ट अटैक का खतरा रहता है। मधुमेह पीडि़त हृदय रोगी की स्थिति बहुत गंभीर होती है। रोगी को बीपी चेक कराते रहना चाहिए। दो से तीन महीने में एक बार हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए।
डायबिटिक रेटीनोपैथी
डायबिटीज के मरीजों में मोतियाबिंद और आंख के पर्दे पर सूजन व इससे अंधेपन की आशंका रहती है। समय पर इलाज न मिलने से आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है। जांच कराते रहें।
इन्होंने की थी इंसुलिन की खोज
कनाडा के वैज्ञानिक सर फ्रेडरिक ग्रांट बैंटिंग ने 1921 में इंसुलिन की खोज कर पहली बार इसका परीक्षण डॉग्स में किया था। दवा के इस्तेमाल के बाद इन्होंने पाया कि रक्त में ग्लूकोज लेवल कम हो गया। 1922 में पहली बार 14 साल के बच्चे लियोनार्ड थॉम्पसन (टाइप-वन डायबिटीज से पीडि़त था) को प्रयोग के तौर पर लगातार इंसुलिन दिया। 1923 में इंसुलिन की खोज के लिए इन्हें दो श्रेणियों (फिजियोलॉजी और मेडिसिन) में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

Sunday, November 11, 2018

अपनाें से बिछड़ने वालों को दिल की बीमारी का खतरा


अपनाें से बिछड़ने वालों को दिल की बीमारी का खतरा


अपनाें को खोने की पीड़ा अक्सर लोगों की आंखों की नींद छीन लेती है। ऐसे लोगों को दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। यह बात हालिया एक शोध में प्रकाश में आई है।
अपनाें से बिछुड़े लोगों को अक्सर नींद में खलल की शिकायत रहती है और वे अनिद्रा रोग के शिकार हो जाते हैं। इससे उनकी शारीरिक पीड़ा बढ़ जाती है। शारीरिक पीड़ा व उत्तेजना अधिक होने पर उनको दिल का दौरा पड़ने का खतरा बना रहता है।
यह बात एक शोध के नतीजों से सामने आई है। यह शोध रिपोर्ट साइकोसोमेटिक मेडिसिल नामक जर्नल में प्रकाशित हुई है।
शोध में पाया गया कि नींद में बाधा और शारीरिक पीड़ा जीवनसाथी से वंचित लोगों में दो से तीन गुनी ज्यादा होती है।
अमेरिका के शिकागो स्थित नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी फीनबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन की शोधार्थी चिरिनोस ने कहा कि जीवनसाथी की मृत्यु काफी तनावपूर्ण घटना होती है। जीवनसाथी को खोने के बाद लोगों को अकेले रहने की आदत डालनी होती है।
उन्होंने कहा, ''इससे वे अनिद्रा के शिकार हो जाते हैं, जिससे तनाव दोगुना हो जाता है। इसके फलस्वरूप उनका प्रतिरक्षी तंत्र अत्यधिक सक्रिय हो जाता है।

Wednesday, November 7, 2018

जानिए हृदय को लंबी उम्र तक कैसे रख सकते हैं स्वस्थ


जानिए हृदय को लंबी उम्र तक कैसे रख सकते हैं स्वस्थ


जानिए हृदय को लंबी उम्र तक कैसे रख सकते हैं स्वस्थ



व्यस्त जीवन शैली में संतुलित खानपान के साथ व्यायाम भी जरूरी है। इससे दिल तंदुरुस्त रहता है और स्वस्थ व लंबी उम्र हो सकती है। जीवन की जिम्मेदारियों व करियर में तरक्की की होड़ में हंसना-मुस्कुराना न भूलें। जानिए कैसे रख सकते हैं हृदय को स्वस्थ।
आहार में फाइबरयुक्त डाइट लें : साबूत दालें-अनाज, सब्जियां जैसे गाजर, टमाटर आदि में ना घुलने वाला फाइबर होता है। दलिया, सेम, लोभिया सूखे मेवे और फल जैसे सेब, नींबू, नाशपाती, अनानास आदि में घुलनशील फाइबर होते हैं। फाइबर युक्त भोजन अधिक समय तक पेट में रहता है, जिसके कारण पेट भरा हुआ महसूस होता है और खाना भी कम खाया जाता है। इसी कारण वजन भी कम होता है। फाइबर युक्त भोजन पाचन के समय शरीर से बसा निकाल देता है, जिसके कारण कॉलेस्ट्रॉल कम होता है व हृदय अधिक तंदुरुस्त होता है। फाइबर युक्त भोजन से अधिक ऊर्जा मिलती है जिसके कारण व्यायाम में थकान कम होती है। फाइबर युक्त भोजन से शरीर व हृदय दोनों सशक्त होते हैं। यह पाचन क्रिया को मजबूत करता है।
खाने में नमक का इस्तेमाल कम करें
भोजन में अधिक नमक की मात्रा ज्यादा होने से रक्तचाप बढ़ जाता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार एक वयस्क को एक दिन में 5 ग्राम से ज्यादा नमक हीं खाना चाहिए। ज्यादा लेने से हृदय संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। जहां तक हो सके ताजा खाना खाएं।
घर के बाहर खाते हैं ज्यादा खाना, मोटापे का बड़ा कारण 
घर पर भोजन करना अधिक पौष्टिक होता हैं, क्योंकि आप स्वयं सब्जी, मसाले, चिकनाई एवं पकाने की विधि का चयन करते हैं। यह खाना सस्ता भी पड़ता है। सब्जियों को अधिक तलकर या भून कर ना बनाएं। इन विधियों में तल की खपत अधिक हाती है जिससे मोटापा बढ़ता है। उबालकर या कम तेल में खाना बनाने की चेष्टा करें और जहां तक हो सके, हमेशा ताजा खाना खाएं। मोटापे से रक्तचाप बढ़ता है और फिर दिल की अनेक बीमारियां होने का सदैव अंदेशा रहता है। इसलिए हमेशा अपने शरीर की जरूरत भर ही खाना खाएं। सब्जियां और फलों की मात्रा बढ़ाएं। घर के बाहर खाने में अक्सर मात्रा का अंदाजा नहीं लग पाता है।
हंसते-मुस्कुराते दौड़ते रहिए 
प्रत्येक व्यक्ति को हर दिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम करना चाहिए। मॉर्निंग वॉक व दौडऩा सेहत के लिए फायदेमंद है। नियमित व्यायाम करने वालों में हृदयरोगों की आशंका अन्यों की अपेक्षा लगभग 45 प्रतिशत तक कम हो जाती है। कोलेस्ट्रॉल और लिपिड के स्तर में भी सुधार होता है। इसके अलावा हंसना दिल के लिए सबसे उत्तम दवा है। एक भरपूर हंसी से पूरे शरीर में 20 फीसदी अधिक रक्त प्रवाहित होता है। एक शोध में यह बात सामने आयी है कि जब लोग कॉमेडी फिल्म देखेते हैं, उनके रक्तप्रवाह में सुधार होता है। यही कारण है कि शायद हंसी तनाव का समाधान हो सकती है। जब आप हंसते हैं तो रक्त वाहिनियों की दीवारों की अंदर की परत को आराम मिलता है और वह फैलती है। एक मिनट में 72 बार धड़कने वाला दिल पूरे दिन में एक लाख बार धड़कता है।
बैड फैट को कहें ना, गुड फैट लें 
तेल, दूध एवं दूध से बनी वस्तुएं और लाल मांस में नुकसानदेह वसा जिसे बैड फैट भी कहते हैं। यह बैड कॉलेस्ट्रॉल यानी एलडील को बढाती है। हृदय को अस्वस्थ करती है, लेकिन मछली, दालें, टोफू, किनुआ आदि खाने से प्रोटीन एवं फायदेमंद वसा दोनों मिलती है। बाजार में मिलने वाले अधिकतर खाने की वस्तुओं में अच्छा पौष्टिक तेल नहीं होता। इस कारण इनका प्रयोग कम से कम करना चाहिए। इसके अलावा चीनी एवं मैदे से बनी चीजों का प्रयोग कम से कम करना चाहिए। भोजन में पौष्टिक तत्त्व जैसे सूखे मेवे, हरी सब्जियां इत्यादि का उपयोग बढ़ा देना चाहिए।

Sunday, November 4, 2018

ये है वजन कम करने का सबसे आसान उपाय, एक बार जरूर आजमाएं


ये है वजन कम करने का सबसे आसान उपाय, एक बार जरूर आजमाएं



आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में वजन कम करना या संतुलित रखना एक मुश्किल टास्क हाे गया है। आमताैर पर वजन कम करने के लिए बहुत सी आहार योजनाअाें और सलाह के बारे में आपने सुना हाेगा जाे तत्काल वजन कम करने का दावा करती हैं। लेकिन उनके कुछ कड़े नियमाें की वजह से हम उनका पालन नहीं कर पाते हैं। लेकिन आज हम आपकाे बताने जा रहे हैं एक एेसी चीज के बारे में जिसके नियमित सेवन से आपके वजन में आसानी से कमी आएगी। आैर वाे चीज है नींबू आैर अदरक की चाय। जी हां, नींबू अदरक की चाय हमारी पाचन क्रिया काे ठीक रख कर हमारा वजन कम करने में मदद करती है।
एेसे हाेता है फायदानींबू विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट में समृद्ध होते हैं, और उनकी अम्लता पाचन में सहायता करती है और लिवर की रक्षा करती है। नींबू में मूत्रवर्धक गुण भी होते हैं, जो आपके शरीर में वसा जलने में मदद करते हैं। नींबू इंसुलिन प्रतिरोध को बढ़ाने और शरीर में वसा के स्तर को कम करने के लिए जाना जाता है।
अदरक के स्वास्थ्य लाभ बहुत सारे हैं। यह रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है, जो अन्यथा वजन कम करने या स्वस्थ खाने की आपकी क्षमता को प्रभावित कर सकता है। अदरक वसा अवशोषण में भी सुधार करता है और शरीर में इसे जमा करने से रोकता है। यह संतृप्ति को बढ़ाता है और भूख के अहसास काे कम करता है, जिससे कारण आपके पेट की वसा जलने लगती हैं।
नींबू और अदरक दोनों में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो सूजन को रोकते हैं और यकृत की गतिविधि को बढ़ाते हैं। इस प्रकार, अदरक और नींबू एक साथ एक शक्तिशाली संयोजन बनाते हैं जो आपके चयापचय को बढ़ावा देता है और अधिक कैलोरी जलता है। नींबू-अदरक चाय न केवल वजन घटाने के लिए एक उत्कृष्ट पेय है, बल्कि त्वचा और बालाें के लिए भी अच्छा है।नींबू और अदरक चाय में वे गुण होते हैं जो वायु प्रदूषण के प्रभावों के खिलाफ प्रतिरोध बनाने में आपकी मदद कर सकते हैं।
कैसे बनाए नींबू अदरक की चायएक कप पानी में थाेड़ा सा अदरक डालकर उबाले।उबलने के बाद इस मिश्रण में नींबू का ताजा रस मिला दें।आैर गरम-गरम पीलें।
नींबू अदरक की चाय कब पीएं
इस पेय से ज्यादा फायदा लेने के लिए सुबह खाली पेट आैर रात काे साेते समय पीना सबसे बेहतर है।

Thursday, November 1, 2018

गम भुलाने के लिए रोना भी होता फायदेमंद, जानें कैसे


गम भुलाने के लिए रोना भी होता फायदेमंद, जानें कैसे


गम भुलाने के लिए रोना भी होता फायदेमंद, जानें कैसे

कोई रोता हुआ दिख जाए तो यही कयास लगाया जाता है कि वे किसी दु:ख या परेशानी में है। अब जापान के वैज्ञानिकों ने रोने को भी मानसिक स्वास्थ्य से जोड़ दिया है। घर- परिवार की परेशानी, ऑफिस की टेंशन, प्रोमोशन, लव अफेयर या किसी ऐसे रिश्ते का टूट जाना जिसको लेकर मन में बहुत योजनाएं बन गई हों तो सबसे अधिक नुकसान दिमाग को होता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि किसी भी पीड़ा, दु:ख, तनाव या अवसाद से गुजर रहा व्यक्ति रो ले तो उसकी कई मानसिक परेशानियां दूर हो सकती हैं।
जापान में हुए इस शोध का परिणाम आने के बाद स्कूल, कॉलेजों और कंपनियों में लोगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे अपने तनाव और दु:ख को याद कर रोएं। इससे व्यक्ति खुद को हल्का और ऊर्जावान महसूस करता है। हफ्ते में एक बार अपने साथ हुई सबसे खराब बात को याद करते हुए रोने की कोशिश करनी चाहिए। मन हल्का होगा और शरीर में स्फूर्ति आएगी और खुद को मजबूत महसूस करेंगे।
जब बच्चों ने कहा रोने से दूर हुई परेशानी
जापान के निप्पन मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर जुंको उमिहारा का कहना है कि रोना सेल्फ डिफेंस की तरह काम करता है। जिस भी बात को लेकर अवसाद या निराशा मन में चल रही होती है वो आंसुओं के जरिए बाहर निकल जाती है। 2014 में जापान के टोहो यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर हिडेहो अरिता ने एक टीम बनाई जिसमें लोगों को रोने के फायदे के बारे में बताया जाता है। बीते माह सात सितंबर को कंसाई के ओसाका हाई स्कूल में आयोजित एक सेमिनार में 79 बच्चों को रोने के ऊपर लेक्चर दिया गया और उसके बाद एक फिल्म दिखाई गई। लेक्चर सुनने और फिल्म देखने के बाद बच्चों को अपने अनुभव लिखने को कहा गया। किसी ने घर परिवार की चिंता को लेकर बात लिखी तो किसी ने अपनी पढ़ाई को लेकर परेशानी बताई। कुछ बच्चे कहानी लिखते वक्त रोते भी नजर आए। इसके बाद उन्होंने कहा कि वे पहले की तुलना में अच्छा महसूस कर रहे हैं जब वे किसी बात को लेकर चिंतित थे।
रोने से निकलता ये हॉर्मोन जो खुशी देता है
1981 में यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के डॉ. विलियम फ्रे ने एक स्टडी की थी जिसका नाम दिया था टीयर एक्सपर्ट। इसमें उन्होंने बताया था कि रोने से एंडॉर्फिन्स हॉर्मोन रिलीज होता है जिससे व्यक्ति खुश और अच्छा महसूस करता है। रिसर्च रिपोर्ट में सलाह दी थी कि एक बार हर व्यक्ति को इसे आजमाकर देखना चाहिए। 2008 में तीन हजार लोगों पर एक शोध में पता चला था कि जब व्यक्ति अकेला और असहाय होता है तो रोने से कठिन परिस्थिति में वे अच्छा महसूस करता है। रोना एक थैरेपी है जिसका स्वास्थय पर अच्छा असर होता है।
हंसने और सोने से अच्छा होता है रोना
जापान के एक निजी स्कूल के 43 वर्षीय शिक्षक हिदेफूमी योशिदा को टीयर्स टीचर कहा जाता है। ये पांच साल से स्कूल में बच्चों को रोने के लिए क्लास चलाते हैं और उन्हें बताते हैं कि कैसे वे अपने तनाव को कम कर सकते हैं। दफ्तरों में काम करने वाले लोगों के लिए कैंप लगाते हैं जहां रोने और आंसू निकलने से होने वाले फायदे के बारे में बताते हैं। इनका कहना है कि खुद को तरोताजा और तनाव से दूर रखना है तो सोने और हंसने से अच्छा है कि कुछ वक्त रो लिया जाए।
ये तरीके भी तनाव से निकलने में फायदेमंद
टियर टीचर योशिदा का कहना है कि गम में डूबा व्यक्ति दु:खी गाने, सैड फिल्में और ऐसी किताबें पढ़ रहा है जिसमें दु:ख देखने या समझने को मिलता है तो इसके लिए उसे कभी मना नहीं करना चाहिए। रोने से दिमाग की कोशिकाएं एक्टिव होती हैं और व्यक्ति को उसके गम या दु:ख से निकलने में मदद करती हैं जिसका सीधा असर उसके जीवन और दिनचर्या में देखने को मिलता है।