Follow by Email

Sunday, September 23, 2018

Water importance


खाना खाते समय पानी का उपयोग
                 अच्छा है या बुरा ?



कहते हैं जल ही जीवन है। जल के बिना धरती पर मानव जीवन की कल्‍पना भी नहीं की जा सकती। मनुष्‍य चांद से लेकर मंगल तक की सतह पर पानी तलाशने की कवायद में लगा है, ताकि वहां जीवन की संभावनायें तलाशी जा सकें। लेकिन, क्‍या धरती पर रहने वाले हम पानी के वा‍स्‍वितक मूल्‍य को समझते हैं। कहते हैं पानी तो जितना पियो उतना कम है। लेकिन, क्‍या यह बात पूरी तरह से सही है। शायद नहीं!
जरूरत से ज्‍यादा पानी पीना भी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। अति हर चीज की बुरी होती है और पानी भी कोई अपवाद नहीं। पानी कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन और वसा की तरह ही पोषण का काम करता है। पानी हमारे घुटनों, कलाई और सभी अंतरंग भागों की चिकनाई के साथ-साथ जोड़ों को स्‍वस्‍थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस लेख में पानी के महत्‍व और उससे जुड़ी कुछ बातों को जानते हैं।
दोस्तों खाने के साथ पानी पिने की बातो को लेकर बहुत सारी भ्रांतिया है

 तो पहले हमलोग जानते है पानी के गुणों के बारे में
*हमारे शरीर का 75% हिसा जो है वो पानी है
*पानी हमारे शरीर को बहुत ही ज्यादा जरुरी है
*पानी की कमी से हमे डिहाइड्रेशन की शिकायत की शिकायत हो जाती है
*जब हमे diarrhoea की समस्या होती है तब हमारे बॉडी से पानी काफी मात्रा
  में पानी निकलता जाता है तब उस समय हमारे शरीर के ऐठन(cramp)होजातीहै ये
   सब पानी की कमी की वजह से होता है

 *हमारे digestive system में बहुत सारे organ है ,बहुत सारे एंजाइम निकलते है और बहुत सारे काम करता है ये system . हमारा digestive system ठीक से कम कर रहा है या नही इसके लिया बहुत सारे टेस्ट भी किये जाते है ,
*पानी एक बहुत अच्छा श्रोत है हमारे जो हमने खाया है उसे पचाने के लिए ,बॉडी को hydrated रकने के लिया और stool को सॉफ्ट रखने के लिया
*सबसे मुख्य कम जो पानी करता है वो है खाना को तोरने का काम (IMMULSIFICATION),जिस से हमारा फ़ूड जल्दी डाइजेस्ट होता है
  खाने से पहले और बाद में क्या पानी पीना चाहिए?
हमारे शरीर में एन्जाइंम से पानी का कार्य नहीं पूरा होता क्योंकि यह हमारे पाचन तंत्रों में मिक्स नहीं हो पाता। पानी तो शरीर में जाने वाले पौष्टिक आहार को टुकड़ों में विभाजित करता है। इसीलिए भोजन करने से कुछ समय पहले पानी पीने की सलाह दी जाती है। और खाने के आधा घंटे बाद पानी पिये

महिलाओं और पुरूषों को कितना पानी पीना चाहिए?
महिलाओं और पुरूषों के पानी पीने की आवश्‍यकता उनके बीएमआर और एक्टिविटी लेवल पर निर्भर करती है। साधारणतयाः जिम न जाने वाले व्यक्ति को 500 कैलोरी और जिम जाने वाले को 1000 कैलोरी के हिसाब से पानी पीना चाहिए। बहरहाल, 100 कैलोरी के लिए 100 एमएल पानी पीना जरूरी है। एक स्‍वस्‍थ व्‍यक्ति के लिए दिन भर में 12-13 गिलास पानी पीना र्प्याप्त होता है
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिला को कितना पानी पीना चाहिए?
पानी गर्भवती के लिए भी बहुत अहम न्यूट्रिशन है। गर्भधारण के समय इसके अलग-अलग रूपों में प्रभाव पड़ते हैं। यह मिसकैरिज, कब्ज और रक्त स्राव को रोकता है। महिला को गर्भ के तीसरे महीने में दोगुने रक्त की जरूरत होती है क्योंकि किडनी का काम ऐसे में अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में फ्लूड की जरूरत भारी मात्रा में पड़ती है। गर्भवती महिला को दिन में जूस व अन्‍य पेय पदार्थों के साथ कम से कम 13 गिलास पानी पीने की सलाह दी जाती है।



Friday, September 21, 2018

वर्तमान सबसे महत्वपूर्ण

                                वर्तमान सबसे महत्वपूर्ण 

जो समय बीत रहा है उसकी बुराई करना बहुत बुरा है ,ऐसी आदत जिंदगी के मजे ही छीन लेती है। हमे इस पर ध्यान देकर इसे छोड़ने  की जरुरत है। 
                                                 वर्तमान को लेकर नकारात्मक सोच गलत बात है। मौजूदा समय हर काल  में नवसृजन और विनाश  दोनों तरफ जाती रहती है। यह हमारी सोच पे निर्भर करता है की हम नवसृजन को चुनते हैं  या विनाश  को। इसके लिए हमे स्वयं के भीतर झाकना होगा। अपने सोच विचार रूपी बग़ीचे में सद्गुणों रूपी फुलवारी है या दुर्गुण रूपी कटीला जंगल है। अगर अस्थूल बगीचे में फल फूल के पौधे कम -खर पतवार ज्यादा हो जाता है तो खर पतवार के बारे में चर्चा नहीं, खुरपि लेकर भिरना  परता है। इसी प्रकार मन रूपी बाग़ में खर पतवार रूपी नकारात्मक विचारो की बढ़ोतरी हो गई है तो उसे उखाड़ फेकना जरुरी है। उसके जगह पर समर्थ एवं सकरात्मत विचारो का मनन चिंतन जरुरी है। साथ ही उन विचारो पर अमल करना आवश्यक है। 



                                                                      हम जो चाहते है उसे पा  सकते है। लेकिन सिर्फ चाहने तक नहीं ,हमे चाह के अनुसार पाने के लिए प्र्यतन करना होगा। हमे जो पाना है उसे पाने में जुट जाना होगा। शिकायत करने के बजाय शिकायत दूर करने का प्रयास करना होगा। हम जितना विकसित होने का प्रयत्न करते है उतना ही विकसित होते है। और हमारा समय सुन्दर होते जाता है। जब हम आतंरिक रूप से सुन्दर होते है अर्थात मन ,बुद्धि ,भावना से सुन्दर होते है तो बाहर भी सुन्दर होता है और समय भी  सुन्दर होता है तो दुनिआ भी  सुन्दर होती है। अतः हम दुनिया को  सुधारना चाहते हैं तो हमें आतंरिक रूप से  जागना होगा। जैसे किसी अंडे का खोल बाहरी शक्ति  से टूटता है तो जीवन का अंत हो जाता है , अगर आतंरिक शक्ति से टूटता है तो एक जीवन की सुरूवात होती है। हमारी शिकायत दूर करने का श्रोत बाहर नहीं भीतर है। भीतर का अर्थ है अपनी सोच विचार और भावना। इनको श्रेष्ठता प्रदान करना। साथ ही भौतिक कार्यो को अच्छी तरह समझना बुझना और पूरी ताकत से करना इस से  हमारा मानसिक तथा भौतिक श्रेष्ठ बनता है। 

Thursday, September 20, 2018

DENGUE

                                               डेंगू 

डेंगू जो  की वायरल बुखार है और ये मादा एडीज इजीप्टी मछर के काटने से  होता है। 
इस मछर के शरीर  पर चीते जैसी धारिया होती है। मछर  दिन में खासकर सुबह में काटते है। डेंगू बरसात के मौसम और उसके फ़ौरन बाद के महीनो में पनपता है ,खासकर जुलाई से अक्टूबर। क्युकी ये मौसम अनुकूल होते है उनके लिए। ये मछर उचाई तक नहीं उड़ सकते। 

कैसे फैलता है 

डेंगू बुखार से पीड़ित मरीज के खून में डेंगू वायरस बहुत मात्रा में होता है। जब कोई ऐडीस इजीप्टी मछर डेंगू के मरीज को काटता है तो वह उस मरीज का खून चूसता  है। खून के साथ डेंगू वायरस व् चला जाता है। 


कब दीखता है बीमारी 

3 -5 दिन के बाद मरीज में डेंगू बुखार के लक्छण आने लगते है। 


टाइप 

1 -क्लासिकल डेंगू फीवर (CLASSICAL DENGUE FEVER)
2 -डेंगू हेमरेजिक फीवर (DENGUE HAEMORRHAGIC FEVER)
3-डेंगू शॉक सिंड्रोम (DENGUE SHOCK SYNDROME)

लक्छण क्लासिकल डेंगू फीवर 

*ठण्ड लगने के बाद अचानक तेज बुखार 
*सिर ,माँसपेसिओ और जोरो में दर्द होता है। 
*आँखों के पिछले हिसे में काफी दर्द  होता है। 
*भूख नहीं लगता है ,जी मिचलाता है ,मुँह का स्वाद ख़राब हो जाता है। 
*गले में दर्द 
*शरीर  खासकर चेहरे ,गर्दन  और छाती पर लाल गुलाबी रंग क्र रैशेस होते है। 
                            ये फीवर 5 -7 दिन में टिक हो जाता है। 


लक्छण डेंगू हेमरेजिक फीवर -

*नाक और मसूढ़ों से खून आना। शौच या उलटी में खून का आना ,स्किन पर गहरे काळा नील रंग के बड़े -छोटे चकत्ते। 


लक्छण डेंगू शॉक सिंड्रोम 


*इसमें DHF के लक्छण के साथ साथ शॉक की अवस्था के भी लक्छण दिखाई देते है। 
*सिर  ठंडा होता है। 
*मरीज धीरे धीरे होश खोने लगता है। 
*ब्लड प्रेशर कम  हो जाता है ,पल्स भी काम ज्यादा होते रहता है। 



जांच 

तेज बुखार हो ,जॉइंट में तेज दर्द हो या रैशेस हो शरीर  पे तो पहले दिन ही टेस्ट करा ले। 
*प्लेटलेट्स के जांच करा ले 


बच्चो  को ज्यादा खतरा 

इम्यून कमजोर होता है ,बच्चे अपनी दिकत को बता व् नहीं पाते ,आप ध्यान दे अगर लक्छण मिले तो तुरंत डॉक्टर से मिले। 

क्या करे 


ठंडा पानी न पिए 
बसी न खाई 
खाने में हल्दी ,आज़माइन ,अदरक ,हींग के सेवन करे। 
हल्का खाना खाये 
छाछ ,नारियल पानी ,निम्बू पानी पिया 

डेंगू से कैसे बचे 

*मछर  को पैदा होने से रोकने के उपाए करे 
*मछर  के काटने से बचे 


होम्योपैथिक बचाव दवा -EUPATORIUM PERF200/ 2 DROP 3 TIME IN A DAY 



अगर डेंगू फीवर   हो गया हो  तो 

1-EUPT PERF 30 2 DROP 3 TIME A DAY 

2-GELSEMIUM 30-2DROP 3 TIME A DAY -FOR WEAKNESS AND THIRST ABSENT

3-BRYONIA 30- 2 DROP 3 TIME A DAY  -FOR PAIN 

4-IPECAC 30 -2 DROP 3 TIME A DAY 


डेंगू हेमरेजिक फीवर में पहले आप डॉक्टर से संपर्क करे क्युकी ये एक खतरनाक प्रॉब्लम है, उसके ट्रीटमेंट से ज्यादा इम्प्रूवमेंट नहीं हो रहा तो साथ में ये मेडिसिन यूज़ करे 

1-CHINA 30 2DROP  FOR 3 TIME  A DAY 

2-HAMMAMELIS 30 -2 DROP 3 TIME A DAY 

3-CAMPHOR 30-2 DROP 3 TIME A DAY 

4-EUPATORIUM PERF 30 -2 DROP 3 TIME A DAY 

5 LACHESIS 30 -2 DROP 3 TIMES A  DAY


MOTHER TINCTURE 

1-CARICA PAPAYA 20 DROP 3 TIMES A DAY WITH WATER 

2-OCIMUM SANTUM -20 DROP 3 TIME A DAY WITH WATER 


Tuesday, September 18, 2018

syzygium jambolanum

                                   सीजीजियम जमबोलिंगम



दोस्तों आज हम बात करेंगे  होम्योपैथीक दवा के बारे में जिसका नाम है सीजीजियम जमबोलिंगम। 

                                                    दोस्तों आप सब ने जामुन के बारे सुना होगा उसका सेवन भी किआ होगा। जामुन के अंदर जो गुटली होती है उसी से इस मेडिसिन का निर्माण होता है। यह मेडिसिन हमारे सरीर में पैंक्रिअटिक सेल पे असर करती है और इन्सुलिन को निकलने में मदद करती है। 

                              चीनी मिले बहुमूत्र की प्रधान दवा है। डॉ बोरिक का कहना है की पेशाब में चीनी आने के प्रॉब्लम को ते मेडिसिन दूर करने में अच्छी काम करती है। तेज प्यास लगना  ,कमजोरी ,दुबलापन ,बहुत ज्यादा मात्रा में और बार -बार पेशाब होना। पेशाब में चीनी का भाग अधिक हो और रोगी कमजोर हो जाये। 

 सीजीजियम  के लक्षण -

*  सरीर के  ऊपर भाग में जलन महसूस होता है।
*इस दवा के रोगी के चेहरे पर छोटे -छोटे लाल रंग के पिम्पल्स होते है ,उनमे बहुत जलन व् होता है। 

*बहुत ज्यादा प्यास लगती है।
*कमजोरी महसूस होता है।
*सरीर दुर्बल होते जाता है ,वजन घटता है। 

*पेशाब ज्यादा होती है। 

*भूख ज्यादा लगती है। 

*अगर स्किन में छाले परे हुआ है जोकि बहुत पुराण है तो ये इसी मेडिसिन का लक्छण है। 


दवा लेने का तरीका -आप इसे 20 बून्द हाफ कप पानी में डालकर दिनभर में 3 बार ले ,
                               डायबिटिक पेशेंट इसे 6 मंथ तक रेगुलर उसे करे आपको इसे काफी लाभ मिलेगा। 

कुछ परहेज जानते है -

 सबसे बारे कारन जो है वो है हमारा अनियमितता यानि की रूटीन में कुछ नहीं करना ,और जो कारन है वो है सॉफ्ट ड्रिंक ,अल्कोहल ,सिगरेट का उपयोग करना। 
                    अगर आप डायबिटिक के प्रकोप से बचना चाहते है तो इन सब से दुरी बना ले और साथ रोज लगभग 5km तक वाकिंग करे ,diabetis हो या न हो। 

               और है जिनके जेनेटिक में diabetis है वो तो अवस्य इन सब बातो का ध्यान दे ताकि उन्हें इस बीमारी का प्रकोप न हो। 

Sunday, September 16, 2018

DIET MANAGEMENT

                               DIET MANAGEMENT



1 -BALANCE डाइट -A /C  TO AGE AND WEIGHT
                                     हम जो डाइट लेते है वो हमारे बॉडी के वेट एंड आयु के हिसाब से निर्धारित होता है। 



2 -अब हम ये देखेंगे की नार्मल डाइट प्लान क्या होना चाहिए एक डायबिटिक पेशेंट में। तो चलिए इसे जानते है। 

* MORNING(7AM)
                                1 कप चाय बिना चीनी के ,इसमें आप शुगर फ्री उसे कर सकते है। 
                                 2 फ्रूट (FIBROUS FRUIT)-50GM ले सकते है। 

*BREAKFAST(9-10AM)
                                 1-3 रोटी ,हरी पते वाली सब्जी ,थोड़ा सलाद खाये। 

*AFTERNOON -सलाद, चावल 50 GM ,दाल 40 -50 GM ,रोटी 2  से 3 ,हरी पते वाली सब्जी ,साथ में दही का सेवन करे 50 GM 

*EVENING-भुना  हुआ चना का सेवन करे शाम  के टाइम में 

*DINNER (रात में )-3 से 4  रोटी ,सब्जी  और साथ में दूध के सेवन करे। 

         NON -VEG DIET

*इसे आप सप्ताह में 2 दिन रात में टाइम में खा सकते है। 

*इन सब के अलावा आप कुछ MINERAL का उपयोग कर सकते है जो की आपके इन्सुलिन के निकलने में मदद करेगा 
                  1 ZINC AND CROMIUM

*आप कुछ विटामिन के उसे कर सकते है जैसे की विटामिन C और विटामिन E ,जो की आपके बॉडी के फ्री रेडिकल निकलने में हेल्प करता है। 


                                                               और सबसे ज्यादा जरुरी जो है वो है एक्सरसाइज जो की हेलप करेगा जो भी हम खाएंगे उसे डाइजेस्ट करने में ,अगर एक्सरसाइज नहीं होगा तो यूटिलाइजेशन नहीं होगा और शुगर का जो मात्रा ब्लड में काम नहीं होगी। 


SELF CONFIDENCE

आत्म विस्वास कैसे प्राप्त किया जाए उसका क्या उपाए है। 




            इसका एक मात्र उपाए है की हम जो समझते है उसको  प्रयोग में लाए। जब प्रयोग में लाएंगे तब जाकर हमारे पास आत्मविश्वास होगा । दुनिया को कोई भी व्यक्ति हमे आत्मविश्वास नहीं दे सकता ,न कोई किताब ,न कोई शिक्षक ,न कोई गुरु दूसरे मात्र प्रोत्साहन ,प्रेरणा एवं प्रकाश दे सकते है उस कार्य को करने के लिए। जब हम करेंगे तब ही आत्म विस्वास प्राप्त होगा अतः हमे प्रयोगिक ,व्यावहारिक होने में लगना चाहिए। प्रयोग एवं व्यवहार द्वारा जब हम आत्म विस्वास से भरते है तो हम जहा भी  रहे वहीं आश्रम होगा। खुद प्रयोगी होने के कारन किसी व् समुदाय से हम अधिक महत्ववूर्ण होंगे। किसी समुदाय की सदस्यता ग्रहण करने से हम वही रहते है है जो हम है। हम समुदाय की आकांछा इसलिए करते हैं की कोई हमे निर्देशित करे ,हमे बताये कि हमे क्या करना है। अतः अभी हम आत्मविस्वासी नहीं बन पाए है क्योकि हमने प्रयोग नहीं किया  है

                                      हम आत्मविश्वास पा सकते है,पर आत्मविश्वास सम्बंधित बातें करने से नहीं पढने से नहीं ,सुनने से नहीं मात्र और मात्र प्रयोग में उतारने से। 




Friday, September 14, 2018

मन का पिंजरा

                                      मन का पिंजरा 


साधारणतः मन आरामदायक स्थिति में रहना चाहता है। ऐसा कर वह खुद को संतुष्ट  पाता है। पर यह संतुष्टि  कितनी वास्तविक है ,यह इसे पता नहीं चलता। मन एक दायरे में रह कर खुश रहे यह एक अलग बात है दायरे को तोरकर खुश रहने में इसे दिकत होता है। मन आरामदायक स्थिति से बाहर निकल नहीं पता तो यह पिंजरे में बंद जैसा है। यह शरीर को ही नहीं चेतना को व् विस्तार नहीं होने देता ,सीमित कर देता है। यह अपने को नज़रबंद करने जैसा है। 

                                      ऐसे लोग संतुष्टि की बात बढ़ -चढ़ के करते रहते है पर इसमें सच्चाई नहीं रहता।इ ऐसे लोग डरपोक होते है। उनके पास विचार है लेकिन एक मॉडल की सकल में ,जिसमे जरा व् घट -बढ़ उन्हें मंजूर नहीं। अगर हमारे पास स्वच्छ शरीर एवं दिमाग है तो सीमाए रास नहीं आ सकती। इसके लिए जरुरी है की सोच की यात्राए अनंत की ओर चलती रहे ये निर्णय लेना होगा की हम कोशिश करना बंद नहीं करेंगे। यह अनंत की यात्रा है ,जो हर दिन,हर पल खुद को आगे बढ़ाने पर आधारित है। चाहे तन, चाहे मन ,चाहे धन ,चाहे आत्मा। 

Wednesday, September 12, 2018

pyorrhoea,pyorrhea Homeopathic Medicine,pyorrhoea treatment






पूरे शरीर के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहने वाले लोग भी अक्सर इस संपूर्ण स्वास्थ्य में दांतों को जोड़ना भूल जाते हैं। दिन में केवल एक बार ब्रश कर लेना ही ओरल केयर नहीं है। ओरल केयर के लिए हर बिंदु पर ध्यान देना जरूरी है, अन्यथा तकलीफ गंभीर हो सकती है। पेरियोडोन्टाइटिस या पायरिया, मुंह की एक ऐसी समस्या है जो इलाज न मिलने पर गंभीर रूप ले सकती है। इस समस्या में मसूड़े की अंदरूनी परत और हड्डियां, दांतों और दांतों के खांचे से दूर हो जाती हैं, इसके कारण छोटे-छोटे गढ्ढेनुमा संरचना बन जाती है और इसमें संक्रमण पैदा करने वाले कारक पनपने लगते हैं। यह संक्रमण सड़न पैदा करता है और इस स्थिति में खूद निकलने से मुंह से बदबू आने लगती है। यही नहीं इससे उस स्थान पर हड्डी के भी क्षतिग्रस्त होने का खतरा हो जाता है। यही नहीं संक्रमण के बढ़ने पर मसूड़ों से खून आने लगता है और पस भी पड़ सकता है।



पायरिया के लक्षण

दांतों की यह समस्या एक दिन में न तो पनपती है न ही इसके लक्षण एक दिन में नजर आते हैं। पायरिया के संबंध में भी यही बात लागू होती है। इसके लक्षण कई दिनों बाद सामने आते हैं। और एक बार लक्षण सामने आने के बाद तेजी से समस्या और बढ़ने लगती है। इसके मुख्य लक्षणों में दांतों में दर्द, खून आना, मसूड़ों में सूजन या उनका फूल जाना, दांतों में गैप आना या दांतों का हिलना, दांतों और मसूड़ों के बीच पॉकेट का बन जाना, हरे, पीले, काले या ग्रे रंग के टार्टर का दांतों पर जमा हो जाना, दांतों की जड़ें दिखने लगना तथा मसूड़ों का सिकुड़ जाना आदि शामिल हैं।


 इसके कारण


इसका उपचार

इस समस्या से बचाव का सबसे सहज तरीका है ओरल हेल्थ पर ध्यान देना। जिसमें दिन में कम से कम दो बार सुबह और रात को सोने से पहले, ब्रश करना, समय-समय पर डेंटिस्ट से दांतों का चेकअप करवाना, दांतों को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी चीज से दूर रहना, जैसे गुटखा, तंबाकू, शराब, सिगरेट, सुपारी, कोल्डड्रिंक, आदि, यदि ओरल हेल्थ से जुड़ी कोई समस्या आपकी फैमिली हिस्ट्री का हिस्सा है तो उसे लेकर सतर्कता बरतना, आदि।





Sunday, September 9, 2018

Constipation Homoeopathy in Hindi Constipation How to relief Constipation






कब्ज, पाचन तंत्र की उस स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई व्यक्ति (या जानवर) का मल बहुत कड़ा हो जाता है तथा मलत्याग में कठिनाई होती है। कब्ज अमाशय की स्वाभाविक परिवर्तन की वह अवस्था है, जिसमें मल निष्कासन की मात्रा कम हो जाती है, मल कड़ा हो जाता है, उसकी आवृति घट जाती है या मल निष्कासन के समय अत्यधिक बल का प्रयोग करना पड़ता है। सामान्य आवृति और अमाशय की गति व्यक्ति विशेष पर निर्भर करती है। एक सप्ताह में 3 से 12 बार मल निष्कासन की प्रक्रिया सामान्य मानी जाती है। 

होमियोपैथी (Homoeopathy)में इलाज के लिए दवाओं का चयन व्यक्तिगत लक्षणों पर आधारित होता है।

यही एक तरीका है जिसके माधयम से रोगी के सब विकाों को दूर कर सम्पूर्ण स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

होमियोपैथी का उद्देश्य कब्ज (Constipation) करने वाले कारणों का सर्वमूल नाश करना है न की केवल कब्ज (Constipation) का ।



जहां तक चिकित्सा सम्बन्धी उपाय की बात है तो होमियोपैथी में कब्ज (Constipation) के लिए अनेक होमियोपैथिक दवाइयां (Homeopathic Drugs)उपलब्ध हैं।





व्यतिगत इलाज़ के लिए एक योग्य होम्योपैथिक (Qualified Homeopathic) डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।


निम्नलिखित होम्योपैथिक दवाइयां कब्ज़ (Constipation) के उपचार में काफी लाभकारी होती है:



गरिकस ( Agaricus)


ऐथूसा (Aethusa)


अलुमन (Alumen)


एलुमिना (Alumina) 


ब्रयोनिआ अलबा (Bryonia alba) 


एलो सोकोट्रिना (Aloe socotrina)


ऐन्टिम क्रूड (Antim crude)


असफ़ोइतिदा (Asafoitida) 


कालकरिअ   कार्ब (Calcaria carb) 

चाइना (China) 

कोलिन्सोनक्सनिआ (Collinsonia)  

ग्रैफाइटिस (Graphites)

नुक्स वोमिका Nux vomica

प्लमबम मेट   Plumbum met

Saturday, September 8, 2018

स्वस्थ रहने की 10 अच्छी आदतें

www.homoeopathyandspiritualityforhealth.com


कहीं भी बाहर से घर आने के बाद, किसी बाहरी वस्तु को हाथ लगाने के बाद, खाना बनाने से पहले, खाने से पहले, खाने के बाद और बाथरूम का उपयोग करने के बाद हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं। यदि आपके घर में कोई छोटा बच्चा है तब तो यह और भी जरूरी हो जाता है। उसे हाथ लगाने से पहले अपने हाथ अच्छे से जरूर धोएं।

* घर में सफाई पर खास ध्यान दें, विशेषकर रसोई तथा शौचालयों पर। पानी को कहीं भी इकट्ठा न होने दें। सिंक, वॉश बेसिन आदि जैसी जगहों पर नियमित रूप से सफाई करें तथा फिनाइल, फ्लोर क्लीनर आदि का उपयोग करती रहें। खाने की किसी भी वस्तु को खुला न छोड़ें। कच्चे और पके हुए खाने को अलग-अलग रखें। खाना पकाने तथा खाने के लिए उपयोग में आने वाले बर्तनों, फ्रिज, ओवन आदि को भी साफ रखें। कभी भी गीले बर्तनों को रैक में नहीं रखें, न ही बिना सूखे डिब्बों आदि के ढक्कन लगाकर रखें।

* ताजी सब्जियों-फलों का प्रयोग करें। उपयोग में आने वाले मसाले, अनाजों तथा अन्य सामग्री का भंडारण भी सही तरीके से करें तथा एक्सपायरी डेट वाली वस्तुओं पर तारीख देखने का ध्यान रखें।

* बहुत ज्यादा तेल, मसालों से बने, बैक्ड तथा गरिष्ठ भोजन का उपयोग न करें। खाने को सही तापमान पर पकाएं और ज्यादा पकाकर सब्जियों आदि के पौष्टिक तत्व नष्ट न करें। साथ ही ओवन का प्रयोग करते समय तापमान का खास ध्यान रखें। भोज्य पदार्थों को हमेशा ढंककर रखें और ताजा भोजन खाएं।

* खाने में सलाद, दही, दूध, दलिया, हरी सब्जियों, साबुत दाल-अनाज आदि का प्रयोग अवश्य करें। कोशिश करें कि आपकी प्लेट में 'वैरायटी ऑफ फूड' शामिल हो। खाना पकाने तथा पीने के लिए साफ पानी का उपयोग करें। सब्जियों तथा फलों को अच्छी तरह धोकर प्रयोग में लाएं।

* खाना पकाने के लिए अनसैचुरेटेड वेजिटेबल ऑइल (जैसे सोयाबीन, सनफ्लॉवर, मक्का या ऑलिव ऑइल) के प्रयोग को प्राथमिकता दें। खाने में शकर तथा नमक दोनों की मात्रा का प्रयोग कम से कम करें। जंकफूड, सॉफ्ट ड्रिंक तथा आर्टिफिशियल शकर से बने ज्यूस आदि का उपयोग न करें। कोशिश करें कि रात का खाना आठ बजे तक हो और यह भोजन हल्का-फुल्का हो।

* अपने विश्राम करने या सोने के कमरे को साफ-सुथरा, हवादार और खुला-खुला रखें। चादरें, तकियों के गिलाफ तथा पर्दों को बदलती रहें तथा मैट्रेस या गद्दों को भी समय-समय पर धूप दिखाकर झटकारें।

* मेडिटेशन, योगा या ध्यान का प्रयोग एकाग्रता बढ़ाने तथा तनाव से दूर रहने के लिए करें।

* कोई भी एक व्यायाम रोज जरूर करें। इसके लिए रोजाना कम से कम आधा घंटा दें और व्यायाम के तरीके बदलते रहें, जैसे कभी एयरोबिक्स करें तो कभी सिर्फ तेज चलें। अगर किसी भी चीज के लिए वक्त नहीं निकाल पा रहे तो दफ्तर या घर की सीढ़ियां चढ़ने और तेज चलने का लक्ष्य रखें। कोशिश करें कि दफ्तर में भी आपको बहुत देर तक एक ही पोजीशन में न बैठा रहना पड़े।

* 45 की उम्र के बाद अपना रूटीन चेकअप करवाते रहें और यदि डॉक्टर आपको कोई औषधि देता है तो उसे नियमित लें। प्रकृति के करीब रहने का समय जरूर निकालें। बच्चों के साथ खेलें, अपने पालतू जानवर के साथ दौड़ें और परिवार के साथ हल्के-फुल्के मनोरंजन का भी समय निकालें।

Can allopathy and homeopathic medicine be taken together?

www.homoeopathyandspiritualityforhealth.com


Yes. Conditions apply. 

Most often than not, patients are advised to continue their medicines, especially when they are prescriptions for chronic illnesses like Diabetes, Hypertension, Hypothyroidism, Cardiac problems, Asthma, Rheumatoid arthritis, Epilepsy, conditions that require steroid therapy. But if they are on medicines that don't create a dependency and patients can survive even without the medicines, then they can be tapered and stopped soon. 

Eg, if a patient is diabetic, and has been on antidiabetics for a long time, which actually do the work that insulin does, you can't stop the medicines immediately. If it is stopped, then the sugar levels will be very high. 

Now if the diabetic wants to take Homeopathy, which stimulates the body to boost its own insulin secretion, he will still need to continue the allopathy since the effects of the Homeopathic stimulation is going to take time, a minimum of 3 months, and is going to be gradual. 

Therefore, the allopathic medicine, first needs to be reduced than abruptly stopped, while confirming normal sugar and HbA1C levels and symptomatic improvement. 

Many patients make a mistake at this point only. If they hear Homeopathy is good, they simply stop taking allopathy on their own and take only Homeopathy. If not strictly advised right at the start, to continue initially, sugar levels rise and then think Homeopathy doesn't work. 

Having said that, there are conditions where you can start directly with stopping the meds, as in when you are not on daily medicines, or every episode fresh cycle of medicine, like in fevers, irregular periods, osteoarthritis, skin problems not on steroids, acidity, constipation and many more. In these conditions, not taking medicines will cause you discomfort but not threaten your survival. At these stages, one might replace the medicines. Even here, it is wise to consider continuing for a short period, until patient shows signs of deeper improvement and then withdraw allopathy. 

Allopathy, Homeopathy, Ayurveda - nothing is important. It is the patient who is. Which heals better, deeper and longer is the best.

Friday, September 7, 2018

What is health?

https://www.homoeopathyandspiritualityforhealth.com/?m=1
Health health and health

          Health is just like to say free from the disease aspect. Every person wants to become healthy it. Means free from disease but the living style of every person make a obstacle to become healthy.

A/c to WHO
                  Health – modern concept
Health is a state of complete physical and social well being and not merely an absence of disease or infirmity.   — World Health Organization (1984).
Operational definition of Health by WHO – a condition or quality of the human organism expressing the adequate functioning of the organism in given conditions, genetic or environmental.
Positive health – it implies the notion of perfect health in body and mind. It cannot become a reality, it always remain a mirage because everything in our life is subject to change.
Dimensions of healthHealth is multidimensional- mainly physical, mental and social (also spiritual, emotional, vocational, political, cultural, socioeconomic, environmental, philosophical, educational, nutritional, curative and preventive dimensions).

A/c to homoeopathy



      Homoeopathy is a therapeutic system which implies a particular way of applying drug to disease according to a specific principle- ‘similia similibus curentur’; and it implies as well the theories of vital force, chronic miasms and dynamisation of drugs.  It considers two important phenomena – the drug phenomenon and the disease phenomenon.
Homœopathy, or homœotherapy, is the department of science in general medicine which has for its principal objects the observation and study of the action of remedial agents in health and disease, and the treatment and cure of disease by medication, according to a fixed law or general principle.
Homœopathy  the principles of the Inductive Method of Science as developed by Lord Bacon. Its practice is governed by the principle of Symptom-Similarity, which is the application in medicine of the universal principle of Mutual Action formulated by Sir Isaac Newton in his Third Law of Motion: “Action and reaction are equal and opposite.” Homœopathy, as a science, rests fundamentally upon four general principles: Similarity, Contrariety, Proportionality and Infinitesimality, reducible to the universal principle of Homœosis, or Universal Assimilation. (Fincke.) – Dr. Stuart Close
Dr. Samuel Hahnemann was a great humanitarian. If we go through his life and works, we can see his quest for a divine therapeutic system for the removal of disease and preservation of health. His prime concern was health. Hahnemann gave extreme importance to the heath in all levels of homoeopathic philosophy. 
In the introduction of “The Friend Of Health” (1792) Hahnemann says – ‘My mission is only to preach upon the greatest of corporeal blessings – health’ i.e. regarding the rational care about the health. In this book, we can see how seriously and comprehensively Hahnemann wished to see all questions of health and public hygiene treated even in the earlier years of his activity.
Vital force and health – “Organon of Medicine” is the book containing the concept of health, disease and its cure – the authority of homoeopathic philosophy. Homoeopathy explains the various dimensions of health in terms of vital force.   In 9th aphorism- “In the healthy condition of man, the spiritual vital force, the dynamis that animates the material body, rules with unbounded sway, and retains all the parts of the organism in admirable, harmonious, vital operation, as regards both sensations and functions, so that our indwelling, reason-gifted mind can freely employ this living healthy instrument for the higher purpose of our existence”. ie, health condition in which all the harmonious vital operations are going on were vital force is the supreme power, which animates and rules providing normal sensations and functions.
The material, organism without vital force, is capable of no sensation, no function, no self preservation; it derives all sensation and functions of life solely by means of the immaterial being (the vital force). In disease the vital force is primarily deranged by the dynamic influence upon it of a morbific agent inimical to life. The resulting abnormal sensations and functions are expressed as morbid symptoms. So symptoms are the outcry of vital force in disease.
Disease is the alternation in state of health of the healthy individual which is expressed by signs and symptoms. Cure is only possible by a change in diseased individual by medicines.  Thus health, disease and cure all phenomena are operating in the dynamic plain.


           

Wednesday, September 5, 2018

What are the best career options after BHMS?



After BHMS,

a) You are entitled to start your private practice after obtaining a valid Registration from state Council of Homoeopathy.
b) Further studies namely Post Graduate degree MD ( Hom) and even PhD studies are also available.
c) You can pursue a Masters degree in Business Administration, MBA, specialization in Health and Hospital Management . Tata Institute of Social Sciences , Mumbai, Symbiosis University, Pune both an internationally accredited institutes runs medical course in India, where Homoeopathic graduates are eligible .
d) You can pursue a career in Research in Homoeopathy under the aegis of Central Council of Research in Homoeopathy (CCRH), an autonomous Council for research under Ministry of AYUSH, Government of India.
e) BHMS is a professional Qualification, and aspire the graduates & Post-graduates for Self employment , besides their Job opportunities in Govt. Non-Govt, offers good opportunities in Corporate sectors like Air India, Railways etc for the welfare of their employees, even in multispecialty hospitals

Tuesday, September 4, 2018

What is the importance of Teacher's Day?


In India, 5th September is celebrated as Teachers' Day as a mark of tribute to the contribution made by teachers to the society.

     Happy Teacher's Day to all of you 

Think about it, no matter where they live, most children will spend at least some of their childhood in a school environment.
Teachers are in the unique position to shape and encourage the minds of people in everysphere of life.
In this day and age, the expectations on teacher is increasingly high. We expect teachers to teach the content and skills, morals and values, kindness and compassion, empathy and discernment. A lot of the things that used to be taught in the family environment are being pushed back onto teachers.

So I think it’s pretty fair to say that teacher’s deserve to have one say, at least, when others recognise the sacrifices they make to ensure that tomorrow’s leaders turn out to be well-rounded human beings.