Follow by Email

Thursday, December 13, 2018

How fever is beneficial?

How fever is beneficial?

1. Leukocytes show maximum phagocytic activity between
38-40°C
2. During fever the circulating iron level goes down. Iron is
helpful for the growth and reproduction of bacteria. So,
when circulating iron level goes down, bacterial growth is
prevented
3. Fever produces direct inhibiting effect on certain viruses
like polio and coxsackie viruses.

होम्योपैथ दवाओं के ज्यादा असर के लिए जानें ये खास बातें


होम्योपैथ दवाओं के ज्यादा असर के लिए जानें ये खास बातें


एलोपैथी में जिस तरह 400 से 500 एमजी की गोली होती है, उसी तरह होम्योपैथी में तीन से लेकर एक लाख की पोटेंसी (पावर) होती है। जिन्हें तीन स्केल डेसिमल, सेंटीसिमल और 50 मिलिसिमल में मापा जाता है। किसी भी दवा की पोटेंसी जितनी ज्यादा होगी उसका प्रभाव उतना ही अधिक होता है। जब दो दवाइयां लेनी होती हैं तो डॉक्टर रोगी को कुछ दिनों के गेप में दवा लेने के लिए कहते हैं क्योंकि दवा की मात्रा बढ़ाकर देने से उसका असर कई दिनों या हफ्तों तक रहता है। असर खत्म होने पर ही दूसरी दवा काम कर पाती है। दवा को सुबह या शाम में लेने के लिए कोई सख्त नियम नहीं होता, लेकिन विशेष समय में इसका असर ज्यादा होता है।
दवा के असर के लिए ये बातें याद रखें -
होम्योपैथी दवा की शीशी कभी खुली जगह पर न रखें और शीशी के ढक्कन को कभी भी खुला न छोड़ें। दवा चाहे लिक्विड हो या गोलियां हों दवा को खुले में रखने से ये बेअसर हो जाती है। दवा को हाथ में लेकर न खाएं इसे सीधे ढक्कन नें लेकर मुंह में डाल लें।
होम्योपैथी दवा खाने से आधे घंटे पहले और आधे घंटे बाद तक कोई चीज न खाएं। इससे दवा जल्दी और प्रभावी तरीके से असर करती है।
होम्योपैथी इलाज के दौरान तंबाकू, शराब, सिगरेट या किसी अन्य नशीली चीज का सेवन न करें।

Wednesday, December 5, 2018

तन अाैर मन दाेनाें काे सेहतमंद रखता है ध्यान


तन अाैर मन दाेनाें काे सेहतमंद रखता है ध्यान



आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मन का सुकून न जाने कहां खाे गया है। हर काेर्इ कुछ हासिल करने की चाह में भागा जा रहा है। इस भागमभाग से लाेग जीवन की इन उपब्धियां ताे हासिल कर रहे हैं लेकिन मन में शांति नहीं है। तनाव ने उन्हें घेर रखा है। हाल के कुछ अध्ययनों से पता चला है कि लोगों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समय से पहले ही खराब हो रहा है।ये बात सच है की हम अपनी उपब्धियाें का जश्न तभी अच्छे से मना सकते हैं जब हम मन आैर तन दाेनाें से सुखी हाें।इसलिए हमें अपने जीवन में उस एक्टिविटी काे भी शामिल करना चाहिए जाे हमारे तनाव काे दूर कर सके। एेसी एक एक्टिविटी है ध्यान, पुराने समय से तन आैर मन काे सेहतमंद रखने के लिए ध्यान का प्रयाेग किया जाता है। ताे भी थाेडा समय निकाल कर ध्यान करें। इससे आपकाे बहुत फायदा हाेगा। आइए जानते हैं ध्यान के फायदे :-
दिमाग और शरीर के लिए ध्यान
ज्यादातर लोगों को नहीं पता होता है कि उन्हें कैसे अपने संतुलन को खोए बिना जीवन की विपरीत परिस्थितियों में दबाव को संभालते हुए खुश और शांत रहना है। मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने और भावनाओं को काबू में रखने के लिए ध्यान सबसे अच्छा और सहज विकल्प है। ध्यान की तकनीक को सीखना और इसका अभ्यास करना आसान है। इसमें हमारे जीवन के सभी क्षेत्रों को प्रभावित करने वाले कई फायदे हैं।
दिमागी क्षमता बढ़ाता है
ध्यान हमें अपने मस्तिष्क के उन क्षेत्रों तक पहुंचने की इजाजत देता है जो गहन विचार और संज्ञान के लिए जिम्मेदार हैं, जिससे हमें रचनात्मक बनने में और निर्णय लेने में मदद मिलती है। ध्यान हमें सतर्क और तेज बनाता है साथ ही इससे याददाश्त भी अच्छी होती है। यहां तक कि शोधकर्ता अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी गंभीर दिमागी बीमारियों के इलाज के रूप में ध्यान को कारगर पा रहे हैं।
सुकून भरी नींद 
हमारी वर्तमान जीवनशैली में हम में से अधिकांश शांत और गहरी नींद से वंचित हैं, जिससे हमारे मस्तिष्क पर भोझ पड़ता है। इससे मनोदशा विकार, कमजोर प्रतिरक्षा, वजन बढ़ना, ह्रदय रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। शोध में पाया गया है कि रात में 6 से 8 घंटे से कम समय तक सोने से मौत का जोखिम 12 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। ध्यान, नींद की बेहतर गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है। कई अध्ययनों से पता चलता है कि सामान्य लोगों की तुलना में ध्यान करने वाले लोग बेहतर और गहरी नींद लेते हैं।
उम्र का प्रभाव कम
ध्यान का प्रभाव हमारे विचार से गहरा बनता है। यह न केवल हमारे मस्तिष्क और व्यवहार को प्रभावित करता है, बल्कि इससे हम खुश, केंद्रित और जागरूक बनते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग ध्यान करते हैं उनकी उम्र के विकास में स्थिरता आती है। इसके अलावा ध्यान से टेलोमेयर ग्रंथि की रक्षा होती है। जैसे-जैसे टेलोमेयर पुरानी होती जाती है , वैसे ही हमारे शरीर और दिमाग भी वृद्ध होता जाता है।

Sunday, November 25, 2018

कहीं आपकी सेहत न खराब कर दे मीठे का शाैक !


कहीं आपकी सेहत न खराब कर दे मीठे का शाैक !


आप अगर मीठे के शाैकिन है तो सावधान हो जाइए, क्याेंकि यह शाैक आपकी सेहत के लिए हानिकारक हाे सकता है। आमतौर पर कुछ दिनाें के अंतराल पर मिठार्इ खा सकते हैं लेकिन राेज अाैर दिन में कर्इ बार मिठार्इयाें का सेवन आपके लिए हानिकारक हो सकता है। खासकर की बाजार की मिठार्इयां, इनसे आपका वजन बढ़ने खतरा ज्यादा रहता है। आइए जानते काैन सा मीठा आपके लिए नुकसान दे है :-
मिठाई
मिठाई के बिना कोई त्यौहार अपूर्ण है। बाजार विभिन्न स्वाद के साथ ही मिठाई और रंग प्रदान करता है। त्योहारों के अवसर पर मिठाई भी खाई जाती है। लेकिन मिठाई हमेशा मात्रा में बहुत खाते हैं क्योंकि यह वजन बढ़ा सकता है। यदि आप वजन कम कर रहे हैं, तो मिठाई से बचने के लिए सबसे अच्छा है। मिठाई में घी का उपयोग किया जाता है। बहुत सारी चीनी का इस्तेमाल मिठाई में किया जाता है। ये सब चीजे वजन बढ़ने के कारण हैं।
केक
जब केक का नाम आता है, तो मुंह में पानी भर जाता है। हर कोई छोटे से बड़े तक, केक खाना पसंद करता है। लेकिन केक और पेस्ट्री पर आइसिंग लगी होती है। इससे खाने से शरीर में शुगर लेवल बढ़ जाता है जिससे खाने से सेहत को नुकसान होता है।
आईसक्रीम
आईसक्रीम एक ऐसी चीज है जो हर मौसम में पसंद से खाई जाती है। लेकिन इसमें उच्च मात्रा में वसा और कैलरी पाई जाती है। यह हृदयरोग का कारण बन सकती है। आइसक्रीम में सैचुरेटेड फैट होता है। सैचुरेटेड फैट की अतिरिक्त खपत से रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा सकती है। इसके अलावा दिल के दौरे और स्ट्रोक का भी खतरा हो सकता है। इसमें शुगर की मात्रा भी अधिक होती है। इससे वजन बढ़ता है।
कोल्ड ड्रिंक
कई लोगों को नियमित कोल्ड ड्रिंक पीने की आदत होती है। पर ये आदत आपके हेल्थ पर गलत प्रभाव डाल सकती है। इसके सेवन से डायबिटीज, मोटापा जैसी बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा कोल्ड ड्रिंक किडनी को भी बहुत नुकसान पहुंचाती हैं। अधिक मात्रा में कोल्ड ड्रिंक का सेवन करने से आपको पथरी और किडनी फेल होने के चांसेस बढ़ जाते हैं। कोल्ड ड्रिंक में भरपूर मात्रा में एसिडिटीक लिक्विड और फास्फोरस जैसे तत्व मौजूद होते हैं।

Tuesday, November 20, 2018

अपने लिए निकालें आधे घंटे का समय, तनाव रहेगा कोसों दूर


अपने लिए निकालें आधे घंटे का समय, तनाव रहेगा कोसों दूर



बदलती लाइफस्टाइल की वजह से आजकल हर कोई तनाव में रहता है लेकिन छोटी-छोटी बातों का ख्याल रख तनाव को मैनेज किया जा सकता है।
समय निकालें:अपने लिए आधे घंटे का समय निकालें। इस दौरान अपनी कार्यक्षमता का आंकलन करें। लक्ष्यों को तय करें और इनके प्रति सकारात्मक सोच अपनाएं।
बढ़िया खाएं:ताजे फल-सब्जियां खाएं व पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं।
व्यायाम करें:
व्यायाम करें, फिल्में देखें व खुद को ट्रीट दें, इससे स्ट्रेस कैमिकल नष्ट होते हैं।
ऐसा न करें:
नशीले पदार्थों के सेवन और धू्रमपान से दूर रहें।
सेविंग:पैसों की कमी से तनाव होता है, इसलिए सेविंग करें।
संगीत:टीवी सीरियल देखने की बजाय म्यूजिक सुनें क्योंकि संगीत सुकून देता है।
शेयरिंग:अपनी भावनाएं दूसरों के साथ शेयर करें।
रिलेशन:किसी को भी दोषी ठहराने से पहले खुद को उसकी जगह रखकर सोचें।
मसाज:हफ्ते में एक बार मसाज करें। रक्त का प्रवाह सही रहेगा और मूड भी अच्छा रहेगा।

Sunday, November 18, 2018

गौर करें कि आपके बच्चे को सुनाई दे रहा है या नहीं


गौर करें कि आपके बच्चे को सुनाई दे रहा है या नहीं


बच्चा जिस परिवेश में भाषा सुनता है, अपने आप उसी तरह बोलने लगता है। लेकिन यदि उसे सुनाई ही न दे तो स्वरयंत्र दुरुस्त होते हुए भी वह मूक रह जाता है। इन बच्चों को समय रहते सुनाई देने लगे तो वे बोलने लगते हैं। इसके लिए गौर करें कि आपके बच्चे को सुनाई दे रहा है या नहीं।
इलाज : कान की कुछ जांचाें के बाद हिअरिंग एड लगाकर बच्चे को समझने व बोलने का अभ्यास कराया जाता है। यह तरीका कारगर न होने पर कॉक्लीयर इम्प्लांट सर्जरी की जाती है। इसमें कृत्रिम रूप से प्रत्यारोपित उपकरण कान के अंदरुनी भाग कॉक्लीया का काम करता है।
इन बातों पर ध्यान दें
- शुरुआती छह माह में बच्चा तेज शोर की ओर ध्यान न दे।
- आवाज करने वाले खिलौनों में दिलचस्पी न ले।
- 6 माह से 15 माह तक माता-पिता की आवाज पर खुश न हो और न ही कोई प्रतिक्रिया देता हो।
- सामान्य शब्दों को भी न समझ सके और 1 से 3 साल तक सरल शब्द जैसे मामा, दादा और पापा भी न बोल पाता हो।

Tuesday, November 13, 2018

डायबिटीज से इन पांच अंगों पर पड़ता बुरा असर


डायबिटीज से इन पांच अंगों पर पड़ता बुरा असर


सभी अंगों पर असर होता है लेकिन पांच अंग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। डायबिटिक फुट भी एक गंभीर समस्या है जिसके कुछ मामलों में पैर काटने तक की नौबत आ जाती है।
डायबिटिक न्यूरोपैथी
मरीज के हाथों-पैरों में सुन्नपन, जलन, दर्द और झुनझुनी होती है, दर्द नहीं होता है। चोट लगने पर पता नहीं चलता है। ब्लड में ग्लूकोज अधिक होने पर सेल्स खराब होते हैं जिससे कुछ अहसास नहीं हो पाता है।
पैरालिसिस अटैक
ब्लड में शुगर की मात्रा बढऩे से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। दिमाग की नसों में थक्का जमने से हाथों व पैरों के काम करने की क्षमता खत्म होती है। पैरालिसिस अटैक से बचने के लिए ब्लड शुगर को नियंत्रित करें।
डायबिटिक नेफ्रोपैथी
अनियंत्रित ब्लड ग्लूकोज से गुर्दों पर बुरा असर पड़ता है। किडनी इंफेक्शन के बाद क्रॉनिक किडनी डिजिज होती है। रोगी का ब्लड प्रेशर भी असंतुलित रहता है। किडनी के मरीजों का डायलिसिस होता है।
हार्ट प्राब्लम
हार्ट अटैक का खतरा रहता है। मधुमेह पीडि़त हृदय रोगी की स्थिति बहुत गंभीर होती है। रोगी को बीपी चेक कराते रहना चाहिए। दो से तीन महीने में एक बार हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए।
डायबिटिक रेटीनोपैथी
डायबिटीज के मरीजों में मोतियाबिंद और आंख के पर्दे पर सूजन व इससे अंधेपन की आशंका रहती है। समय पर इलाज न मिलने से आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है। जांच कराते रहें।
इन्होंने की थी इंसुलिन की खोज
कनाडा के वैज्ञानिक सर फ्रेडरिक ग्रांट बैंटिंग ने 1921 में इंसुलिन की खोज कर पहली बार इसका परीक्षण डॉग्स में किया था। दवा के इस्तेमाल के बाद इन्होंने पाया कि रक्त में ग्लूकोज लेवल कम हो गया। 1922 में पहली बार 14 साल के बच्चे लियोनार्ड थॉम्पसन (टाइप-वन डायबिटीज से पीडि़त था) को प्रयोग के तौर पर लगातार इंसुलिन दिया। 1923 में इंसुलिन की खोज के लिए इन्हें दो श्रेणियों (फिजियोलॉजी और मेडिसिन) में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

Sunday, November 11, 2018

अपनाें से बिछड़ने वालों को दिल की बीमारी का खतरा


अपनाें से बिछड़ने वालों को दिल की बीमारी का खतरा


अपनाें को खोने की पीड़ा अक्सर लोगों की आंखों की नींद छीन लेती है। ऐसे लोगों को दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। यह बात हालिया एक शोध में प्रकाश में आई है।
अपनाें से बिछुड़े लोगों को अक्सर नींद में खलल की शिकायत रहती है और वे अनिद्रा रोग के शिकार हो जाते हैं। इससे उनकी शारीरिक पीड़ा बढ़ जाती है। शारीरिक पीड़ा व उत्तेजना अधिक होने पर उनको दिल का दौरा पड़ने का खतरा बना रहता है।
यह बात एक शोध के नतीजों से सामने आई है। यह शोध रिपोर्ट साइकोसोमेटिक मेडिसिल नामक जर्नल में प्रकाशित हुई है।
शोध में पाया गया कि नींद में बाधा और शारीरिक पीड़ा जीवनसाथी से वंचित लोगों में दो से तीन गुनी ज्यादा होती है।
अमेरिका के शिकागो स्थित नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी फीनबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन की शोधार्थी चिरिनोस ने कहा कि जीवनसाथी की मृत्यु काफी तनावपूर्ण घटना होती है। जीवनसाथी को खोने के बाद लोगों को अकेले रहने की आदत डालनी होती है।
उन्होंने कहा, ''इससे वे अनिद्रा के शिकार हो जाते हैं, जिससे तनाव दोगुना हो जाता है। इसके फलस्वरूप उनका प्रतिरक्षी तंत्र अत्यधिक सक्रिय हो जाता है।

Wednesday, November 7, 2018

जानिए हृदय को लंबी उम्र तक कैसे रख सकते हैं स्वस्थ


जानिए हृदय को लंबी उम्र तक कैसे रख सकते हैं स्वस्थ


जानिए हृदय को लंबी उम्र तक कैसे रख सकते हैं स्वस्थ



व्यस्त जीवन शैली में संतुलित खानपान के साथ व्यायाम भी जरूरी है। इससे दिल तंदुरुस्त रहता है और स्वस्थ व लंबी उम्र हो सकती है। जीवन की जिम्मेदारियों व करियर में तरक्की की होड़ में हंसना-मुस्कुराना न भूलें। जानिए कैसे रख सकते हैं हृदय को स्वस्थ।
आहार में फाइबरयुक्त डाइट लें : साबूत दालें-अनाज, सब्जियां जैसे गाजर, टमाटर आदि में ना घुलने वाला फाइबर होता है। दलिया, सेम, लोभिया सूखे मेवे और फल जैसे सेब, नींबू, नाशपाती, अनानास आदि में घुलनशील फाइबर होते हैं। फाइबर युक्त भोजन अधिक समय तक पेट में रहता है, जिसके कारण पेट भरा हुआ महसूस होता है और खाना भी कम खाया जाता है। इसी कारण वजन भी कम होता है। फाइबर युक्त भोजन पाचन के समय शरीर से बसा निकाल देता है, जिसके कारण कॉलेस्ट्रॉल कम होता है व हृदय अधिक तंदुरुस्त होता है। फाइबर युक्त भोजन से अधिक ऊर्जा मिलती है जिसके कारण व्यायाम में थकान कम होती है। फाइबर युक्त भोजन से शरीर व हृदय दोनों सशक्त होते हैं। यह पाचन क्रिया को मजबूत करता है।
खाने में नमक का इस्तेमाल कम करें
भोजन में अधिक नमक की मात्रा ज्यादा होने से रक्तचाप बढ़ जाता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार एक वयस्क को एक दिन में 5 ग्राम से ज्यादा नमक हीं खाना चाहिए। ज्यादा लेने से हृदय संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। जहां तक हो सके ताजा खाना खाएं।
घर के बाहर खाते हैं ज्यादा खाना, मोटापे का बड़ा कारण 
घर पर भोजन करना अधिक पौष्टिक होता हैं, क्योंकि आप स्वयं सब्जी, मसाले, चिकनाई एवं पकाने की विधि का चयन करते हैं। यह खाना सस्ता भी पड़ता है। सब्जियों को अधिक तलकर या भून कर ना बनाएं। इन विधियों में तल की खपत अधिक हाती है जिससे मोटापा बढ़ता है। उबालकर या कम तेल में खाना बनाने की चेष्टा करें और जहां तक हो सके, हमेशा ताजा खाना खाएं। मोटापे से रक्तचाप बढ़ता है और फिर दिल की अनेक बीमारियां होने का सदैव अंदेशा रहता है। इसलिए हमेशा अपने शरीर की जरूरत भर ही खाना खाएं। सब्जियां और फलों की मात्रा बढ़ाएं। घर के बाहर खाने में अक्सर मात्रा का अंदाजा नहीं लग पाता है।
हंसते-मुस्कुराते दौड़ते रहिए 
प्रत्येक व्यक्ति को हर दिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम करना चाहिए। मॉर्निंग वॉक व दौडऩा सेहत के लिए फायदेमंद है। नियमित व्यायाम करने वालों में हृदयरोगों की आशंका अन्यों की अपेक्षा लगभग 45 प्रतिशत तक कम हो जाती है। कोलेस्ट्रॉल और लिपिड के स्तर में भी सुधार होता है। इसके अलावा हंसना दिल के लिए सबसे उत्तम दवा है। एक भरपूर हंसी से पूरे शरीर में 20 फीसदी अधिक रक्त प्रवाहित होता है। एक शोध में यह बात सामने आयी है कि जब लोग कॉमेडी फिल्म देखेते हैं, उनके रक्तप्रवाह में सुधार होता है। यही कारण है कि शायद हंसी तनाव का समाधान हो सकती है। जब आप हंसते हैं तो रक्त वाहिनियों की दीवारों की अंदर की परत को आराम मिलता है और वह फैलती है। एक मिनट में 72 बार धड़कने वाला दिल पूरे दिन में एक लाख बार धड़कता है।
बैड फैट को कहें ना, गुड फैट लें 
तेल, दूध एवं दूध से बनी वस्तुएं और लाल मांस में नुकसानदेह वसा जिसे बैड फैट भी कहते हैं। यह बैड कॉलेस्ट्रॉल यानी एलडील को बढाती है। हृदय को अस्वस्थ करती है, लेकिन मछली, दालें, टोफू, किनुआ आदि खाने से प्रोटीन एवं फायदेमंद वसा दोनों मिलती है। बाजार में मिलने वाले अधिकतर खाने की वस्तुओं में अच्छा पौष्टिक तेल नहीं होता। इस कारण इनका प्रयोग कम से कम करना चाहिए। इसके अलावा चीनी एवं मैदे से बनी चीजों का प्रयोग कम से कम करना चाहिए। भोजन में पौष्टिक तत्त्व जैसे सूखे मेवे, हरी सब्जियां इत्यादि का उपयोग बढ़ा देना चाहिए।

Sunday, November 4, 2018

ये है वजन कम करने का सबसे आसान उपाय, एक बार जरूर आजमाएं


ये है वजन कम करने का सबसे आसान उपाय, एक बार जरूर आजमाएं



आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में वजन कम करना या संतुलित रखना एक मुश्किल टास्क हाे गया है। आमताैर पर वजन कम करने के लिए बहुत सी आहार योजनाअाें और सलाह के बारे में आपने सुना हाेगा जाे तत्काल वजन कम करने का दावा करती हैं। लेकिन उनके कुछ कड़े नियमाें की वजह से हम उनका पालन नहीं कर पाते हैं। लेकिन आज हम आपकाे बताने जा रहे हैं एक एेसी चीज के बारे में जिसके नियमित सेवन से आपके वजन में आसानी से कमी आएगी। आैर वाे चीज है नींबू आैर अदरक की चाय। जी हां, नींबू अदरक की चाय हमारी पाचन क्रिया काे ठीक रख कर हमारा वजन कम करने में मदद करती है।
एेसे हाेता है फायदानींबू विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट में समृद्ध होते हैं, और उनकी अम्लता पाचन में सहायता करती है और लिवर की रक्षा करती है। नींबू में मूत्रवर्धक गुण भी होते हैं, जो आपके शरीर में वसा जलने में मदद करते हैं। नींबू इंसुलिन प्रतिरोध को बढ़ाने और शरीर में वसा के स्तर को कम करने के लिए जाना जाता है।
अदरक के स्वास्थ्य लाभ बहुत सारे हैं। यह रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है, जो अन्यथा वजन कम करने या स्वस्थ खाने की आपकी क्षमता को प्रभावित कर सकता है। अदरक वसा अवशोषण में भी सुधार करता है और शरीर में इसे जमा करने से रोकता है। यह संतृप्ति को बढ़ाता है और भूख के अहसास काे कम करता है, जिससे कारण आपके पेट की वसा जलने लगती हैं।
नींबू और अदरक दोनों में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो सूजन को रोकते हैं और यकृत की गतिविधि को बढ़ाते हैं। इस प्रकार, अदरक और नींबू एक साथ एक शक्तिशाली संयोजन बनाते हैं जो आपके चयापचय को बढ़ावा देता है और अधिक कैलोरी जलता है। नींबू-अदरक चाय न केवल वजन घटाने के लिए एक उत्कृष्ट पेय है, बल्कि त्वचा और बालाें के लिए भी अच्छा है।नींबू और अदरक चाय में वे गुण होते हैं जो वायु प्रदूषण के प्रभावों के खिलाफ प्रतिरोध बनाने में आपकी मदद कर सकते हैं।
कैसे बनाए नींबू अदरक की चायएक कप पानी में थाेड़ा सा अदरक डालकर उबाले।उबलने के बाद इस मिश्रण में नींबू का ताजा रस मिला दें।आैर गरम-गरम पीलें।
नींबू अदरक की चाय कब पीएं
इस पेय से ज्यादा फायदा लेने के लिए सुबह खाली पेट आैर रात काे साेते समय पीना सबसे बेहतर है।

Thursday, November 1, 2018

गम भुलाने के लिए रोना भी होता फायदेमंद, जानें कैसे


गम भुलाने के लिए रोना भी होता फायदेमंद, जानें कैसे


गम भुलाने के लिए रोना भी होता फायदेमंद, जानें कैसे

कोई रोता हुआ दिख जाए तो यही कयास लगाया जाता है कि वे किसी दु:ख या परेशानी में है। अब जापान के वैज्ञानिकों ने रोने को भी मानसिक स्वास्थ्य से जोड़ दिया है। घर- परिवार की परेशानी, ऑफिस की टेंशन, प्रोमोशन, लव अफेयर या किसी ऐसे रिश्ते का टूट जाना जिसको लेकर मन में बहुत योजनाएं बन गई हों तो सबसे अधिक नुकसान दिमाग को होता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि किसी भी पीड़ा, दु:ख, तनाव या अवसाद से गुजर रहा व्यक्ति रो ले तो उसकी कई मानसिक परेशानियां दूर हो सकती हैं।
जापान में हुए इस शोध का परिणाम आने के बाद स्कूल, कॉलेजों और कंपनियों में लोगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे अपने तनाव और दु:ख को याद कर रोएं। इससे व्यक्ति खुद को हल्का और ऊर्जावान महसूस करता है। हफ्ते में एक बार अपने साथ हुई सबसे खराब बात को याद करते हुए रोने की कोशिश करनी चाहिए। मन हल्का होगा और शरीर में स्फूर्ति आएगी और खुद को मजबूत महसूस करेंगे।
जब बच्चों ने कहा रोने से दूर हुई परेशानी
जापान के निप्पन मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर जुंको उमिहारा का कहना है कि रोना सेल्फ डिफेंस की तरह काम करता है। जिस भी बात को लेकर अवसाद या निराशा मन में चल रही होती है वो आंसुओं के जरिए बाहर निकल जाती है। 2014 में जापान के टोहो यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर हिडेहो अरिता ने एक टीम बनाई जिसमें लोगों को रोने के फायदे के बारे में बताया जाता है। बीते माह सात सितंबर को कंसाई के ओसाका हाई स्कूल में आयोजित एक सेमिनार में 79 बच्चों को रोने के ऊपर लेक्चर दिया गया और उसके बाद एक फिल्म दिखाई गई। लेक्चर सुनने और फिल्म देखने के बाद बच्चों को अपने अनुभव लिखने को कहा गया। किसी ने घर परिवार की चिंता को लेकर बात लिखी तो किसी ने अपनी पढ़ाई को लेकर परेशानी बताई। कुछ बच्चे कहानी लिखते वक्त रोते भी नजर आए। इसके बाद उन्होंने कहा कि वे पहले की तुलना में अच्छा महसूस कर रहे हैं जब वे किसी बात को लेकर चिंतित थे।
रोने से निकलता ये हॉर्मोन जो खुशी देता है
1981 में यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के डॉ. विलियम फ्रे ने एक स्टडी की थी जिसका नाम दिया था टीयर एक्सपर्ट। इसमें उन्होंने बताया था कि रोने से एंडॉर्फिन्स हॉर्मोन रिलीज होता है जिससे व्यक्ति खुश और अच्छा महसूस करता है। रिसर्च रिपोर्ट में सलाह दी थी कि एक बार हर व्यक्ति को इसे आजमाकर देखना चाहिए। 2008 में तीन हजार लोगों पर एक शोध में पता चला था कि जब व्यक्ति अकेला और असहाय होता है तो रोने से कठिन परिस्थिति में वे अच्छा महसूस करता है। रोना एक थैरेपी है जिसका स्वास्थय पर अच्छा असर होता है।
हंसने और सोने से अच्छा होता है रोना
जापान के एक निजी स्कूल के 43 वर्षीय शिक्षक हिदेफूमी योशिदा को टीयर्स टीचर कहा जाता है। ये पांच साल से स्कूल में बच्चों को रोने के लिए क्लास चलाते हैं और उन्हें बताते हैं कि कैसे वे अपने तनाव को कम कर सकते हैं। दफ्तरों में काम करने वाले लोगों के लिए कैंप लगाते हैं जहां रोने और आंसू निकलने से होने वाले फायदे के बारे में बताते हैं। इनका कहना है कि खुद को तरोताजा और तनाव से दूर रखना है तो सोने और हंसने से अच्छा है कि कुछ वक्त रो लिया जाए।
ये तरीके भी तनाव से निकलने में फायदेमंद
टियर टीचर योशिदा का कहना है कि गम में डूबा व्यक्ति दु:खी गाने, सैड फिल्में और ऐसी किताबें पढ़ रहा है जिसमें दु:ख देखने या समझने को मिलता है तो इसके लिए उसे कभी मना नहीं करना चाहिए। रोने से दिमाग की कोशिकाएं एक्टिव होती हैं और व्यक्ति को उसके गम या दु:ख से निकलने में मदद करती हैं जिसका सीधा असर उसके जीवन और दिनचर्या में देखने को मिलता है।

Wednesday, October 31, 2018

तेजी से घट रहा है वजन, तो इन बीमारियाें काे हाे सकते हैं संकेत


तेजी से घट रहा है वजन, तो इन बीमारियाें काे हाे सकते हैं संकेत


तेजी से घट रहा है वजन, तो इन बीमारियाें काे हाे सकते हैं संकेत


स्वस्थ इंसान के वजन का निर्धारण उसके भोजन, उम्र, लंबाई आदि के आधार पर किया जाता है। अक्सर कई वजहों से वजन घटता-बढ़ता रहता है। लेकिन अगर ठीक खान-पान के बावजूद और बिना कोई कोशिश किए तेजी से वजन कम हो रहा है तो मामला गंभीर हो सकता है। खासतौर पर अगर छह महीने में पांच फीसदी से ज्यादा या फिर पांच किलो तक वजन कम हो गया हो तो फिर ये किसी गंभीर बीमारी का लक्षण हो सकता है।
डायबिटीज की आशंका
अगर आपको बार-बार प्यास और भूख लगती है, शरीर भी थका-थका रहता है। पेशाब के लिए बार-बार जाना पड़ता है। तेजी से वजन भी घट रहा है तो आप डायबिटीज की समस्या से पीडि़त हो सकते हैं। इस बीमारी में ब्लड शुगर को शरीर ग्रहण नहीं कर पाता और यह शुगर पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकल आता है। इस क्रिया में काफी ऊर्जा खर्च होती है। जिससे वजन गिरने लग जाता है।
हाइपोथाइरॉयड के संकेत
कई बार हाइपोथाइरॉयड के मरीजों का वजन भी तेजी से गिरता है। थकान, सिरदर्द, बार-बार भूख लगना, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसे लक्षणों के साथ अगर तेजी से वजन भी गिर रहा हो तो ये हाइपोथाइरॉयड का लक्षण हो सकता है। हालांकि हाइपोथाइरॉयड के मरीजों में कई बार उल्टा भी होता है। यानी उनका वजन तेजी से बढ़ता है।
तनाव होना
कई बार तनाव की दशा में इंसान को भूख कम लगती है। कम खाने की वजह से शरीर को जरूरी ईंधन नहीं मिल पाता। ऐसे में शरीर में जमा फैट टूटकर ग्लूकोज में बदलता है और शरीर इसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल करता है। इस वजह से भी वजन कम होने लग जाता है।
कैंसर होना
कैंसर के एक तिहाई मामलों में खासकर ज्यादा उम्र वालों में वजन तेजी से घटता है। इसकी वजह है कि कैंसर कोशिकाएं तेजी से बढ़ती है और इसके लिए उन्हें भारी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत होती है।
मानसिक रूप से अस्वस्थ
तेजी से वजन कम होने की वजहों में मानसिक रूप से कमजोर होना भी है। यदि कोई व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान है या फिर उसका इलाज चल रहा हो तो भी ऐसे व्यक्ति का वजन तेजी से बढऩे लगता है या फिर गिरने लगता है।
किसी काम का दबाव होना
कई मामलों में दबाव या प्रेशर भी वजन गिरने का कारण बनते हैं। बुरे हालात या मुश्किलों में भी इंसान कम वजन की चपेट में आ जाता है। जब हम कम खाना खाते हैं तो शरीर को संपूर्ण कैलारी व ऊर्जा नहीं मिल पाती, ऐसे में पोषक तत्वों के अभाव से हमारी प्रतिरोधात्मक क्षमता कम हो जाती है। इसके अलावा लिवर या दिल की समस्याओं के कारण भी वजन कम हो सकता है। इसलिए जब भी वजन कम हो तो इसे नजरअंदाज मत कीजिए।
आंतों की बीमारी
कई बार पेट और आंत संबंधी बीमारियों में शरीर भोजन को पूरी तरह से ग्रहण नहीं कर पाता और जो भोजन शरीर में जाता भी है उसका प्रयोग जरूरत के मुताबिक नहीं हो पाता इसलिए तेजी से वजन घटता है।

Monday, October 29, 2018

घुटने के जोड़ों की उम्र बढ़ाती है गुणकारी हल्दी , लम्बे समय तक दर्द में रहता है अाराम


घुटने के जोड़ों की उम्र बढ़ाती है गुणकारी हल्दी , लम्बे समय तक दर्द में रहता है अाराम

कम्युनिटी ओरिएन्टेड प्रोग्राम फॉर कंट्रोल ऑफ रियुमेटिक डिजीज द्वारा जोड़ों के दर्द और बीमारियों के सम्बंध में एशिया-पैसेफिक रीजन में किए एक शोध के मुताबिक जोड़ों में होने वाले दर्द में घुटनों के दर्द का प्रतिशत सर्वाधिक 13.2 है। इस अध्ययन ने एक और भ्रांति दूर की है कि यह समस्या सिर्फ वृद्धों में ही पाई जाती है, अध्ययन के दौरान पाया गया कि 18.2 प्रतिशत युवा भी जोड़ के रोगों से प्रभावित हो रहे हैं।
घुटने में दर्द की कई वजहें होती है। लिगामेंट्स का क्षतिग्रस्त हो जाना भी घुटने में दर्द पैदा होने की एक बड़ी वजह है। इनमें से कुछ प्रमुख हैं-आर्थराइटिस, रीयूमेटाइड, आस्टियोआर्थराइटिस और गाउट जैसी तकलीफों से दर्द होता है।टेन्टीनाइटिस में घुटने में सामने की ओर दर्द होता है। यह दर्द सीढिय़ों अथवा चढ़ाव पर चढ़ते और उतरते समय बढ़ जाता है। यह धावकों और साइकिल चलाने वालों को ज्यादा होता है।घिसा हुआ कार्टिलेज या उपास्थि भी घुटने में दर्द की वजह होती है। इसे मेनिस्कस टियर भी कहा जाता है। इस समस्या के दौरान घुटने के जोड़ के अंदर की ओर या बाहर की ओर दर्द पैदा हो सकता है।चोट लगना और फ्रेक्चर होने जैसी समस्याएं भी घुटने की हालत खराब कर सकते हैं। इन सबके अलावा नीकैप के खिसकने, जोड़ में संक्रमण जैसी समस्याओं से भी घुटने में स्थाई दर्द हो सकता है।
ऐसे करें नी केयर
- कैल्शियम को अपने भोजन का हिस्सा बनाइए।
- सेंट जॉन मेडिकल कॉलेज, बैंगलोर में हुए शोध में सामने आया कि हल्दी के नियमित इस्तेमाल से जोड़ो के दर्द में राहत मिलती है और जोड़ लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं। 
- घुटने से जुड़े व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाइए। धीरे-धीरे साइकिल चलाना एक अच्छा विकल्प है लेकिन यह घुटने की तकलीफ होने से पहले का परामर्श है। दर्द का सामना कर रहे लोगों को इससे बचना चाहिए। 
- अपनी क्षमता से ज्यादा वजन उठाने से बचें। ऐसा करके आप अपने पूरे शारीरिक ढांचे को खतरे में डाल रहे हैं। अगर आपका वजन ज्यादा है तो ये खतरे की घंटी है।

Friday, October 26, 2018

गर्भवती और ये मरीज डॉक्टरी सलाह बिना न करें करवाचौथ व्रत


गर्भवती और ये मरीज डॉक्टरी सलाह बिना न करें करवाचौथ व्रत

गर्भवती और ये मरीज डॉक्टरी सलाह बिना न करें करवाचौथ व्रत


करवाचौथ का व्रत महिलाएं पति की लम्बी उम्र और युवतियां अच्छा पति पाने के लिए करती हैं। बहुत सी महिलाएं निर्जला व्रत करती हैं, जिससे शरीर में पानी व जरूरी पोषक तत्त्वों की कमी भी हो सकती है। ऐसे में व्रत से पहले और व्रत के बाद खाने-पीने की आदतें सेहत को नुकसान पहुंचाती हैं। इस कारण कई महिलाओं को शाम होने तक चक्कर आते हैं। जानते हैं, करवाचौथ पर कैसे अपनी सेहत का ख्याल रखें। 

व्रत से पहले न खाएं मीठी चीजें

महिलाएं अक्सर व्रत से एक दिन पहले हैवी डिनर करती हैं। बदहजमी की दिक्कत हो सकती है। व्रत से पहले सुबह मीठा व ऐसा कुछ न खाएं जिससे प्यास ज्यादा लगे। मीठा खाने से प्यास ज्यादा लगती है। 

व्रत के बाद न पीएं चाय-कॉफी

व्रत खोलने के बाद हैवी खाना तला-भुना फ़ास्ट-फ़ूड न लें। यदि लेते हैं तो गैस, एसिडिटी और पेट संबंधी समस्या हे सकती है। सबसे पहले आधा गिलास पानी पीएं। इसके बाद सूप या कम फैट का दूध ले सकती हैं। फिर फल, सूखे मेवे और संतुलित व सुपाच्य खाएं। सेहत के लिए फायदेमंद रहेगा। व्रत रखने के बाद कमजोरी लगने पर प्रोटीन से भरपूर आहार लें। इससे शरीर को एनर्जी मिलेगी। इसके अलावा नींबू पानी, लस्सी, नारियल पानी और मौसमी का जूस और दही के साथ फलों का इस्तेमाल कर सकते हैं। व्रत के तुरंत बाद चाय और कॉफ़ी न पीएं, इससे एसिडिटी हो सकती है। 
लो बीपी के मरीज तो रखें विशेष ध्यान
लो बीपी की समस्या में ज्यादा देर तक भूखा रहने से बीपी कम हो सकता है। इससे बेहोशी, हाथ-पांव ठंडे होकर जकडऩ जैसी समस्या हो सकती है। थोड़े समय के अंतराल पर फलाहार जरूर लें। इससे शरीर में ऊर्जा बनी रहेगी। गैस की दिक्कतमें व्रत शुरू करने से पहले तली चीजें खाने से सिरदर्द, एसिडिटी बढ़ सकती है। मधुमेह, दवा लेने वाले और गर्भवती, स्तनपान कराने वाली महिलाएं डॉक्टर की सलाह के बिना व्रत न करें। 
गर्भवती महिलाओं की दिनचर्या 
गर्भवती डॉक्टर की सलाह से व्रत करें तो खानपान का ख़ास ख्याल रखें। निर्जल व्रत न रखें, हर दो घंटे के बाद फलाहार और पौष्टिक आहार का इस्तेमाल करना चाहिए। पानी ना पीने से डिहाइड्रेशन होने का खतरा रहता है। दिनभर भूखे-प्यासे रहने से गर्भवती के शरीर में हाइपोग्लाइसिमिक शुगर का लेवल गिर सकता है। गर्भावस्था के आखिरी तीन महीने में व्रत न रखें। व्रत के दौरान बेहोशी, चक्कर और उल्टी के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। जूस, मिल्क शेक्स, फ्रूट्स, रायता, मीठी लस्सी और खाने में साबूदाने खिचड़ी या टिकिया इस्तेमाल कर सकते हैं। शुरुआत के तीन महीनों में जिन महिलाओं को जी मिचलाना, उल्टी जैसी समस्या होने पर व्रत रखने की सलाह नहीं दी जाती है। गर्भावस्था के आखिरी तीन महीनों में व्रत में भूखे-प्यासे रहने से गर्भ में भ्रूण की हलचल धीमी हो जाती है। कुछ महिलाओं में पानी की कमी पायी जाती है, उन्हें व्रत नहीं करना चाहिए, बच्चे की ह्रदय गति अनियंत्रित हो सकती है। 
सरगी में सुबह ड्राई फ्रूट्स लें 
करवाचौथ के व्रत में सुबह सरगी खाई जाती है, जिसके बाद महिलाएं दिनभर भूखे रहकर व्रत करती हैं। सरगी में सुबह ड्राई फ्रूट्स लें, जिससे दिनभर भूख नहीं लगेगी और ऊर्जावान रहेंगें। गुनगुना दूध ले सकते हैं।

Systemic Examination

Systemic Examination 

Systemic Examination

Systemic examination reviews the major systems of the body like the Central nervous system, Respiratory system, Cardiovascular system and Gastrointestinal system.
Generally, there are 4 parts of physical examination:
     Inspection: Looking for signs
     Palpation: Feeling for signs
     Percussion: Tapping for signs, used when doing a lung, heart or gut examination.
     Auscultation: Listening for sounds within the body using a stethoscope, or in olden times, purely listening with direct ear.
The module is designed in such a way that the user can do the systemic examination of these systems of the virtual patient using the above mentioned 4 main techniques.
Systemic examination is currently divided into 4 sub-modules/segments:
     Central Nervous System
     Respiratory System
     Cardiovascular System
     Abdomen Examination
Each of these modules is further classified into various examinations/techniques/activities which are explained in detail below. The doctor needs to do only those activities relevant for the given virtual case to diagnose correctly.

Wednesday, October 24, 2018

प्रसव के बाद मसल्स कमजोर होने से रहती है कब्ज


प्रसव के बाद मसल्स कमजोर होने से रहती है कब्ज

प्रसव के बाद मसल्स कमजोर होने से रहती है कब्ज


कब्ज का एक प्रकार है ओडीएस यानी ऑब्स्ट्रक्टिव डिफिकेट्री सिंड्रोम। इसमें व्यक्ति को मोशन करने की इच्छा तो होती है लेकिन वह कर नहीं पाता। क्षमता से ज्यादा जोर लगाने के बावजूद स्टूल पास नहीं कर पाता। महिलाओं में ऐसा ज्यादा होता है। कारण प्रसव के बाद कूल्हे व आसपास की नसों का कमजोर होना अहम है। अक्सर व्यक्ति समस्या को साक्षा करने में हिचकिचाता है। 
बे समय से कब्ज की समस्या और गुदा मार्ग की मांसपेशियों के कमजोर होने से अक्सर व्यक्ति को ओडीएस के शिकायत रहती है। तकलीफ के गंभीर रूप लेने का एक कारण समस्या को छिपाना भी है। ज्यादातर मरीज तकलीफ के बढऩे पर जब विशेषज्ञ के पास जाते हैं तो बार-बार पूछने पर हिचकिचाते हुए बताते हैं कि उन्हें कई बार अंगुली के सहारे स्टूल निकालना पड़ता है। ओडीएस की दिक्कत होने पर मोशन करने की सोच से व्यक्ति बार-बार शौचालय जाता है लेकिन पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हो पाता। भोजन में फाइबर व प्रोटीन युक्त चीजें लें। जैसे मौसमी, हरी सब्जियां, सोयाबीन, दालें, दानामेथी, अलसी के बीज आदि। मार्केट की चीजों से जितना हो सके परहेज करें। शाकाहारी भोजन लें।
इन लक्षणों से होती पहचान 
मरीज को गुदा व इसके आसपास हल्का दर्द महसूस होता है। साथ ही प्रभावित भाग पर व चारों तरफ घाव या कई बार खून आने की शिकायत। कई बार इस समस्या की पहचान पाइल्स के रूप में उभरकर आती है। इंफेक्शन भी एक लक्षण है। 
परेशानी को नजरअंदाज न करें 
अक्सर बुजुर्गों में देखा गया है कि वे पेट या मोशन संबंधी किसी भी परेशानी के लिए चूर्ण या आयुर्वेदिक उपचार अपनाते लेते हैं। हालांकि इनसे फर्क भी पड़ता है। लेकिन बिना आयुर्वेदाचार्य के निर्देश से लिया गया चूर्ण भी स्थिति को धीरे-धीरे गंभीर कर देता है। परेशानी को नजरअंदाज करने से महिलाओं में भविष्य में यूरिनरी इन्कॉन्टिनेंस और मोशन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं।
पहचान के लिए ये जांचें कराते 
प्रॉक्टोस्कोपी, अल्ट्रासाउंड, एमआरआई आदि के माध्यम से रोग की स्थिति पता करते हैं। मुख्य रूप से एमआरडी (मैग्नेटिक रिसोनेंस डिटेक्टर) को अपनाते हैं। इसमें परेशानी वाले हिस्से की वीडियो बनाते हैं व स्टडी कर इलाज तय करते हैं। 
दिनचर्या व खानपान में बदलाव
रोग की गंभीरता और स्थिति के आधार पर दवाएं देते हैं और दिनचर्या व खानपान में बदलाव किया जाता है। एडवांस्ड स्टेज में स्ट्रक्चरल डिफैक्ट्स को देखकर सर्जरी करते हैं। प्रमुख रूप से स्टेपल्ड ट्रांसेनल रेक्टल रिसेक्शन (स्टार) करते हैं। दिनचर्या में योग और एक्सरसाइज को कम से कम 20 मिनट जरूर करें। वहीं महिलाओं को पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज करनी चाहिए।