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Thursday, December 13, 2018

How fever is beneficial?

How fever is beneficial?

1. Leukocytes show maximum phagocytic activity between
38-40°C
2. During fever the circulating iron level goes down. Iron is
helpful for the growth and reproduction of bacteria. So,
when circulating iron level goes down, bacterial growth is
prevented
3. Fever produces direct inhibiting effect on certain viruses
like polio and coxsackie viruses.

होम्योपैथ दवाओं के ज्यादा असर के लिए जानें ये खास बातें


होम्योपैथ दवाओं के ज्यादा असर के लिए जानें ये खास बातें


एलोपैथी में जिस तरह 400 से 500 एमजी की गोली होती है, उसी तरह होम्योपैथी में तीन से लेकर एक लाख की पोटेंसी (पावर) होती है। जिन्हें तीन स्केल डेसिमल, सेंटीसिमल और 50 मिलिसिमल में मापा जाता है। किसी भी दवा की पोटेंसी जितनी ज्यादा होगी उसका प्रभाव उतना ही अधिक होता है। जब दो दवाइयां लेनी होती हैं तो डॉक्टर रोगी को कुछ दिनों के गेप में दवा लेने के लिए कहते हैं क्योंकि दवा की मात्रा बढ़ाकर देने से उसका असर कई दिनों या हफ्तों तक रहता है। असर खत्म होने पर ही दूसरी दवा काम कर पाती है। दवा को सुबह या शाम में लेने के लिए कोई सख्त नियम नहीं होता, लेकिन विशेष समय में इसका असर ज्यादा होता है।
दवा के असर के लिए ये बातें याद रखें -
होम्योपैथी दवा की शीशी कभी खुली जगह पर न रखें और शीशी के ढक्कन को कभी भी खुला न छोड़ें। दवा चाहे लिक्विड हो या गोलियां हों दवा को खुले में रखने से ये बेअसर हो जाती है। दवा को हाथ में लेकर न खाएं इसे सीधे ढक्कन नें लेकर मुंह में डाल लें।
होम्योपैथी दवा खाने से आधे घंटे पहले और आधे घंटे बाद तक कोई चीज न खाएं। इससे दवा जल्दी और प्रभावी तरीके से असर करती है।
होम्योपैथी इलाज के दौरान तंबाकू, शराब, सिगरेट या किसी अन्य नशीली चीज का सेवन न करें।

Wednesday, December 5, 2018

तन अाैर मन दाेनाें काे सेहतमंद रखता है ध्यान


तन अाैर मन दाेनाें काे सेहतमंद रखता है ध्यान



आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मन का सुकून न जाने कहां खाे गया है। हर काेर्इ कुछ हासिल करने की चाह में भागा जा रहा है। इस भागमभाग से लाेग जीवन की इन उपब्धियां ताे हासिल कर रहे हैं लेकिन मन में शांति नहीं है। तनाव ने उन्हें घेर रखा है। हाल के कुछ अध्ययनों से पता चला है कि लोगों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समय से पहले ही खराब हो रहा है।ये बात सच है की हम अपनी उपब्धियाें का जश्न तभी अच्छे से मना सकते हैं जब हम मन आैर तन दाेनाें से सुखी हाें।इसलिए हमें अपने जीवन में उस एक्टिविटी काे भी शामिल करना चाहिए जाे हमारे तनाव काे दूर कर सके। एेसी एक एक्टिविटी है ध्यान, पुराने समय से तन आैर मन काे सेहतमंद रखने के लिए ध्यान का प्रयाेग किया जाता है। ताे भी थाेडा समय निकाल कर ध्यान करें। इससे आपकाे बहुत फायदा हाेगा। आइए जानते हैं ध्यान के फायदे :-
दिमाग और शरीर के लिए ध्यान
ज्यादातर लोगों को नहीं पता होता है कि उन्हें कैसे अपने संतुलन को खोए बिना जीवन की विपरीत परिस्थितियों में दबाव को संभालते हुए खुश और शांत रहना है। मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने और भावनाओं को काबू में रखने के लिए ध्यान सबसे अच्छा और सहज विकल्प है। ध्यान की तकनीक को सीखना और इसका अभ्यास करना आसान है। इसमें हमारे जीवन के सभी क्षेत्रों को प्रभावित करने वाले कई फायदे हैं।
दिमागी क्षमता बढ़ाता है
ध्यान हमें अपने मस्तिष्क के उन क्षेत्रों तक पहुंचने की इजाजत देता है जो गहन विचार और संज्ञान के लिए जिम्मेदार हैं, जिससे हमें रचनात्मक बनने में और निर्णय लेने में मदद मिलती है। ध्यान हमें सतर्क और तेज बनाता है साथ ही इससे याददाश्त भी अच्छी होती है। यहां तक कि शोधकर्ता अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी गंभीर दिमागी बीमारियों के इलाज के रूप में ध्यान को कारगर पा रहे हैं।
सुकून भरी नींद 
हमारी वर्तमान जीवनशैली में हम में से अधिकांश शांत और गहरी नींद से वंचित हैं, जिससे हमारे मस्तिष्क पर भोझ पड़ता है। इससे मनोदशा विकार, कमजोर प्रतिरक्षा, वजन बढ़ना, ह्रदय रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। शोध में पाया गया है कि रात में 6 से 8 घंटे से कम समय तक सोने से मौत का जोखिम 12 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। ध्यान, नींद की बेहतर गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है। कई अध्ययनों से पता चलता है कि सामान्य लोगों की तुलना में ध्यान करने वाले लोग बेहतर और गहरी नींद लेते हैं।
उम्र का प्रभाव कम
ध्यान का प्रभाव हमारे विचार से गहरा बनता है। यह न केवल हमारे मस्तिष्क और व्यवहार को प्रभावित करता है, बल्कि इससे हम खुश, केंद्रित और जागरूक बनते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग ध्यान करते हैं उनकी उम्र के विकास में स्थिरता आती है। इसके अलावा ध्यान से टेलोमेयर ग्रंथि की रक्षा होती है। जैसे-जैसे टेलोमेयर पुरानी होती जाती है , वैसे ही हमारे शरीर और दिमाग भी वृद्ध होता जाता है।

Sunday, November 25, 2018

कहीं आपकी सेहत न खराब कर दे मीठे का शाैक !


कहीं आपकी सेहत न खराब कर दे मीठे का शाैक !


आप अगर मीठे के शाैकिन है तो सावधान हो जाइए, क्याेंकि यह शाैक आपकी सेहत के लिए हानिकारक हाे सकता है। आमतौर पर कुछ दिनाें के अंतराल पर मिठार्इ खा सकते हैं लेकिन राेज अाैर दिन में कर्इ बार मिठार्इयाें का सेवन आपके लिए हानिकारक हो सकता है। खासकर की बाजार की मिठार्इयां, इनसे आपका वजन बढ़ने खतरा ज्यादा रहता है। आइए जानते काैन सा मीठा आपके लिए नुकसान दे है :-
मिठाई
मिठाई के बिना कोई त्यौहार अपूर्ण है। बाजार विभिन्न स्वाद के साथ ही मिठाई और रंग प्रदान करता है। त्योहारों के अवसर पर मिठाई भी खाई जाती है। लेकिन मिठाई हमेशा मात्रा में बहुत खाते हैं क्योंकि यह वजन बढ़ा सकता है। यदि आप वजन कम कर रहे हैं, तो मिठाई से बचने के लिए सबसे अच्छा है। मिठाई में घी का उपयोग किया जाता है। बहुत सारी चीनी का इस्तेमाल मिठाई में किया जाता है। ये सब चीजे वजन बढ़ने के कारण हैं।
केक
जब केक का नाम आता है, तो मुंह में पानी भर जाता है। हर कोई छोटे से बड़े तक, केक खाना पसंद करता है। लेकिन केक और पेस्ट्री पर आइसिंग लगी होती है। इससे खाने से शरीर में शुगर लेवल बढ़ जाता है जिससे खाने से सेहत को नुकसान होता है।
आईसक्रीम
आईसक्रीम एक ऐसी चीज है जो हर मौसम में पसंद से खाई जाती है। लेकिन इसमें उच्च मात्रा में वसा और कैलरी पाई जाती है। यह हृदयरोग का कारण बन सकती है। आइसक्रीम में सैचुरेटेड फैट होता है। सैचुरेटेड फैट की अतिरिक्त खपत से रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा सकती है। इसके अलावा दिल के दौरे और स्ट्रोक का भी खतरा हो सकता है। इसमें शुगर की मात्रा भी अधिक होती है। इससे वजन बढ़ता है।
कोल्ड ड्रिंक
कई लोगों को नियमित कोल्ड ड्रिंक पीने की आदत होती है। पर ये आदत आपके हेल्थ पर गलत प्रभाव डाल सकती है। इसके सेवन से डायबिटीज, मोटापा जैसी बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा कोल्ड ड्रिंक किडनी को भी बहुत नुकसान पहुंचाती हैं। अधिक मात्रा में कोल्ड ड्रिंक का सेवन करने से आपको पथरी और किडनी फेल होने के चांसेस बढ़ जाते हैं। कोल्ड ड्रिंक में भरपूर मात्रा में एसिडिटीक लिक्विड और फास्फोरस जैसे तत्व मौजूद होते हैं।

Tuesday, November 20, 2018

अपने लिए निकालें आधे घंटे का समय, तनाव रहेगा कोसों दूर


अपने लिए निकालें आधे घंटे का समय, तनाव रहेगा कोसों दूर



बदलती लाइफस्टाइल की वजह से आजकल हर कोई तनाव में रहता है लेकिन छोटी-छोटी बातों का ख्याल रख तनाव को मैनेज किया जा सकता है।
समय निकालें:अपने लिए आधे घंटे का समय निकालें। इस दौरान अपनी कार्यक्षमता का आंकलन करें। लक्ष्यों को तय करें और इनके प्रति सकारात्मक सोच अपनाएं।
बढ़िया खाएं:ताजे फल-सब्जियां खाएं व पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं।
व्यायाम करें:
व्यायाम करें, फिल्में देखें व खुद को ट्रीट दें, इससे स्ट्रेस कैमिकल नष्ट होते हैं।
ऐसा न करें:
नशीले पदार्थों के सेवन और धू्रमपान से दूर रहें।
सेविंग:पैसों की कमी से तनाव होता है, इसलिए सेविंग करें।
संगीत:टीवी सीरियल देखने की बजाय म्यूजिक सुनें क्योंकि संगीत सुकून देता है।
शेयरिंग:अपनी भावनाएं दूसरों के साथ शेयर करें।
रिलेशन:किसी को भी दोषी ठहराने से पहले खुद को उसकी जगह रखकर सोचें।
मसाज:हफ्ते में एक बार मसाज करें। रक्त का प्रवाह सही रहेगा और मूड भी अच्छा रहेगा।

Sunday, November 18, 2018

गौर करें कि आपके बच्चे को सुनाई दे रहा है या नहीं


गौर करें कि आपके बच्चे को सुनाई दे रहा है या नहीं


बच्चा जिस परिवेश में भाषा सुनता है, अपने आप उसी तरह बोलने लगता है। लेकिन यदि उसे सुनाई ही न दे तो स्वरयंत्र दुरुस्त होते हुए भी वह मूक रह जाता है। इन बच्चों को समय रहते सुनाई देने लगे तो वे बोलने लगते हैं। इसके लिए गौर करें कि आपके बच्चे को सुनाई दे रहा है या नहीं।
इलाज : कान की कुछ जांचाें के बाद हिअरिंग एड लगाकर बच्चे को समझने व बोलने का अभ्यास कराया जाता है। यह तरीका कारगर न होने पर कॉक्लीयर इम्प्लांट सर्जरी की जाती है। इसमें कृत्रिम रूप से प्रत्यारोपित उपकरण कान के अंदरुनी भाग कॉक्लीया का काम करता है।
इन बातों पर ध्यान दें
- शुरुआती छह माह में बच्चा तेज शोर की ओर ध्यान न दे।
- आवाज करने वाले खिलौनों में दिलचस्पी न ले।
- 6 माह से 15 माह तक माता-पिता की आवाज पर खुश न हो और न ही कोई प्रतिक्रिया देता हो।
- सामान्य शब्दों को भी न समझ सके और 1 से 3 साल तक सरल शब्द जैसे मामा, दादा और पापा भी न बोल पाता हो।

Tuesday, November 13, 2018

डायबिटीज से इन पांच अंगों पर पड़ता बुरा असर


डायबिटीज से इन पांच अंगों पर पड़ता बुरा असर


सभी अंगों पर असर होता है लेकिन पांच अंग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। डायबिटिक फुट भी एक गंभीर समस्या है जिसके कुछ मामलों में पैर काटने तक की नौबत आ जाती है।
डायबिटिक न्यूरोपैथी
मरीज के हाथों-पैरों में सुन्नपन, जलन, दर्द और झुनझुनी होती है, दर्द नहीं होता है। चोट लगने पर पता नहीं चलता है। ब्लड में ग्लूकोज अधिक होने पर सेल्स खराब होते हैं जिससे कुछ अहसास नहीं हो पाता है।
पैरालिसिस अटैक
ब्लड में शुगर की मात्रा बढऩे से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। दिमाग की नसों में थक्का जमने से हाथों व पैरों के काम करने की क्षमता खत्म होती है। पैरालिसिस अटैक से बचने के लिए ब्लड शुगर को नियंत्रित करें।
डायबिटिक नेफ्रोपैथी
अनियंत्रित ब्लड ग्लूकोज से गुर्दों पर बुरा असर पड़ता है। किडनी इंफेक्शन के बाद क्रॉनिक किडनी डिजिज होती है। रोगी का ब्लड प्रेशर भी असंतुलित रहता है। किडनी के मरीजों का डायलिसिस होता है।
हार्ट प्राब्लम
हार्ट अटैक का खतरा रहता है। मधुमेह पीडि़त हृदय रोगी की स्थिति बहुत गंभीर होती है। रोगी को बीपी चेक कराते रहना चाहिए। दो से तीन महीने में एक बार हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए।
डायबिटिक रेटीनोपैथी
डायबिटीज के मरीजों में मोतियाबिंद और आंख के पर्दे पर सूजन व इससे अंधेपन की आशंका रहती है। समय पर इलाज न मिलने से आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है। जांच कराते रहें।
इन्होंने की थी इंसुलिन की खोज
कनाडा के वैज्ञानिक सर फ्रेडरिक ग्रांट बैंटिंग ने 1921 में इंसुलिन की खोज कर पहली बार इसका परीक्षण डॉग्स में किया था। दवा के इस्तेमाल के बाद इन्होंने पाया कि रक्त में ग्लूकोज लेवल कम हो गया। 1922 में पहली बार 14 साल के बच्चे लियोनार्ड थॉम्पसन (टाइप-वन डायबिटीज से पीडि़त था) को प्रयोग के तौर पर लगातार इंसुलिन दिया। 1923 में इंसुलिन की खोज के लिए इन्हें दो श्रेणियों (फिजियोलॉजी और मेडिसिन) में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।